मुंबई का एलीफेंटा उत्सव कल से, कैलाश खेर सहित कई कलाकार बिखरेंगे रंग

मुंबई। सुप्रसिद्ध एलीफेंटा उत्सव इस बार नए रंगों के साथ आ रहा है।  एक जून से शुरू हो रहे इस दो दिवसीय उत्सव में कला और संस्कृति को ऐसे विविध रंग बिखरेंगे जो लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाएंगे।  

यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट ‘एलीफेंटा’ की गुफाओं को देखने के लिए दुनिया भर के लोग आते हैं और इसी धरोहर के संवर्धन के लिए 1989 में इस फेस्टिवल की शुरुआत की गई थी।  उत्सव का उद्देश्य यही था कि लोगों को सुर ,संगीत ,शिल्प और चित्रकला का संगम एक साथ देखने मिले।  

इस बार है खास – 

सुर ,संगीत ,शिल्प और चित्रकला का संगम इस बार एक जून से शुरू हो रहे दो दिवसीय एलीफेंटा उत्सव में दिखेगा। इस बार उत्सव का नाम स्वरंग है । इस समारोह में गीत, संगीत, गायन, पर्यटन, हेरिटेज वॉक  और चित्रकला सहित अनेक रंग दिखाई देंगे। महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम की ऒर से एलिफेंटा उत्सव का आयोजन किया जा रहा जा रहा है।

इस विविधताओं से भरे उत्सव की शुरुआत मशहूर गेट वे आफ इंडिया से होगी जहां विशिष्ट अतिथियो की उपस्थिति में शिव के आराधक गायक कैलाश खेर महादेव का आह्वान करेंगे । महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री जयकुमार रावल जी उत्सव का उद्धाटन  करेंगे। समारोह में कई मशहूर हस्तियां भी मौजूद रहेंगी । पूरी तरह से निःशुल्क (फ्री एंट्री) एलीफेंटा उत्सव का उद्घाटन एक जून को शाम छह बजे गेट वे इंडिया पर होगा।  दो जून को ये स्वरंग उत्सव एलीफेंटा परिसर में सुबह 10 बजे से शुरू होगा।  

दूसरे दिन रविवार को एलीफेंटा की गुफाओं के साथ स्वरंग बिखरेगा । इस अविस्मरणीय कार्यक्रम की शुरुआत हेरिटेज वाक से होगी, जहां आप एलीफेंटा के इतिहास  और वैभव से परिचित होंगे । मशहूर मराठी रंगकर्मी स्वप्निल बाँदोड़कर और गायिका प्रियंका बर्वे अपने साथी कलाकारों के साथ नृत्य ,नाट्य, राग रंग और संगीत का अद्भुत समा बांधेगी। वरिष्ठ रंगकर्मी अच्युत पालव ,चित्रकार वासुदेव कामत, व्यंग चित्रकार नीलेश जाधव और शेर जाधव अपनी कूची से अलबेले रंग बिखरेंगें। संगीत, नाट्य और चित्रकला की त्रयी स्वरंग आपको लंबे समय तक याद रहेगी।

पर्यटन विभाग की सचिव विनीता वेद सिंघल,पर्यटन संचालक दिलीप गावड़े और व्यवस्थापकिय संचालक अभिमन्यु काले अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस उत्सव को सफल बनाने के लिए लगातार परिश्रम कर रहे हैं ।

मुम्बई की पहचान गेटवे ऑफ इंडिया से लेकर समंदर की लहरों पर सवार होकर एलिफेंटा की गुफाओं तक हर जगह आपको ये रंग बिखरे मिलेंगे । 1500 साल से ज्यादा पुराने इतिहास को समेटे घारापुरी, जो एलीफेंटा के नाम से पहचानी जाती है उसके इतिहास ,वैभव और नये स्वरूप से रूबरू होने का ये सबसे बेहतरीन समय है।

कहाँ है एलीफेंटा – 

मुंबई से 7 समुद्री मील दूर घारापुरी में एक छोटा सा द्वीप है, जहाँ एलिफेंटा की गुफाएं हैं।  एलीफेंट यानि हाथी की पत्थर पर तराशी गई प्रतिमा को देखते हुए इसे पुर्तगालियों ने एलीफेंटा का नाम दिया गया। लगभग हर 30 मिनिट बाद अपोलो बंदर से एलीफेंटा के बीच नाव चलती है, शाम के बाद ये सेवा बंद कर दी जाती है। 

क्या है यहां – 

 पौराणिक देवताओं के प्रतिमाओं से भरी एलीफेंटा में सात गुफाएं हैं, जिनमें से सबसे महत्‍वपूर्ण महेश मूर्ति की गुफ़ा है । एलीफेंटा में भगवान् शिव की लीला रूप में स्थापित मूर्ति कला का नमूना मिलता है, जिसमें महायोगी, नटेश्वर, भैरव, पार्वती-परिणय, अर्धनारीश्वर, पार्वतीमान, कैलाशधारी रावण, महेशमूर्ति शिव तथा त्रिमूर्ति शामिल है । 

 पुर्तगाल के यात्री वाँन लिंसकोटन के ‘डिस्कोर्स आव वायेजेज ‘ नामक ग्रन्थ के मुताबिक 16वीं सदी में यहाँ एक द्वीप था और उस पर मुंबई तट पर बसने वाले पुर्तग़ालियों का अधिकार था। इन व्यापारियों को कला से कोई मतलब नहीं था इसलिए इस द्वीप की सुंदर गुफाओं का गोशालाओं, चारा रखने के गोदामों, यहां तक कि चांदमारी के लिए प्रयोग करके इनका वैभव ख़त्म कर दिया गया था ।  बाद में उन गुफाओं का संरक्षण किया गया और यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड हेरिटेज माना है।   एलीफेंटा यानि घारपुरी में शेटबंदर, राजबंदर और मोराबन्दर नाम के गांव हैं।  यहाँ आबादी कम है और यहाँ के लोग धान की खेती और मछली पकड़ने का व्यवसाय करते हैं। 

कब शुरू हुआ था एलीफेंटा उत्सव 

महाराष्ट्र के कई प्रसिद्ध कला उत्सवों में से एक एलीफेंटा उत्सव की शुरुआत 1989 में हुई थी। इसका उद्देश्य एलीफेंटा की गुफाओं में मौजूद भारतीय संस्कृति की प्राचीन धरोहर को संजोने के  लिए किये जा रहे प्रयासों को लोगों तक और पुरजोर तरीके से पहुंचना और उनमें इंडियन हेरिटेज के प्रति जागरूकता पैदा करना।  साल 2008 में जब आतंकियों ने ताज होटल सहित मुंबई में हमला किया था  उसके बाद से सुरक्षा की दृष्टि से गेट वे इंडिया पर इसका आयोजन करीब नौ साल तक बंद कर दिया गया था।