Richa Chadda रचनाकारों के लिए हुई अभियान मे शामिल,अभिनेताओं से किया लेखकों और निर्देशकों को बढ़ावा देने का आग्रह

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Richa Chadda
Richa Chadda

मुंबई | वरुण ग्रोवर और स्वानंद किरकिरे द्वारा चलाए गए अभियान को सोशल मीडिया पर काफी लोगों का सपोर्ट मिल रहा है, जिससे हक़दार रचनाकारों को क्रेडिट ना देने के बारे में चर्चा ने काफी जोर पकड़ लिया है | यह एक सिंपल सी बात है कि अगर किसी ने किसी आर्ट फॉर्म में कोई रचना बनाई है, तो उन्हें अपने काम के लिए भुगतान और श्रेय दिया जाना चाहिए।अब हाल ही में अभिनेत्री Richa Chadda भी इस अभियान से जुड़ गयी है |

ऋचा चड्ढा का मानना है कि हमारा फिल्म उद्योग स्टार कल्चर से प्रभावित है, जहां एक फिल्म के पोस्टर सिर्फ मुख्य अभिनेता और अभिनेत्रियों को बढ़ावा देते नज़र आते हैं , यह अभिनेताओं की ज़िम्मेदारी है की उनको बढ़ावा दे जो फिल्मों का निर्माण करते हैं। इंडस्ट्री में लेखकों और निर्देशकों को वह प्यार और प्रशंसा नहीं मिलती जिसके वे हकदार हैं | ऋचा का कहना है कि यह हर किसी की और विशेष रूप से अभिनेताओं और स्टार्स की जिम्मेदारी है कि उन लेखकों को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए जागरूक हो जो फिल्मों या शो की नींव रखते हैं।

CreditDeDeYaar वास्तव में एक आंदोलन था जिसे गीतकारों द्वारा शुरू किया गया था जिन्हें संगीत लेबल द्वारा गाने का श्रेय नहीं दिया जाता है। यह आंदोलन, अपने व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में बात करने के लिए जुड़ने वाले लेखकों और रचनाकारों के साथ आगे बढ़ता गया | ऋचा ने अभिनेताओं से यह आग्रह किया हैं कि वे जितना ज्यादा हो सके प्रतिभाशाली रचनाकारों को बढ़ावा दें, जो कैमरे के पीछे चुपचाप काम करते हैं।

Richa Chadda ने कहा, “रचनाकारों और लेखकों के लिए अधिकारों को जीतने का एक आंदोलन लंबे समय से पेंडिंग है। हम अभिनेता के रूप में इन रचनाओं के चेहरे बन जाते हैं, इसलिए यह मेरा कर्त्तव्य बन जाता है कि उन् सभी रचनाकारों को उनका उचित श्रेय मिले।” हमारे सहयोगियों को बढ़ावा देने में हमे गर्व होना चाहिए। मैं नीरज घायवान, मृगदीप लांबा जैसे रचनाकारों / लेखकों को हमेशा अपने करियर को आगे बढाने का श्रेय देती हूं। मेरे लिए, वे हमेशा सम्मान के मामले मेंशीर्ष पर रहने वाले हैं। उन्होंने मेरे लिए यादगार करैक्टर और कहानियां लिखी हैं। ।

“क्रेडिट दे दे यार इस बात की याद दिलाता है कि हम उन लोगों के प्रति कितने अन्यायी हैं जिनके कंधों पर हम खड़े हैं और यह समय है जब हम सही दिशा में बदलाव लाने के लिए कदम आगे बढ़ाये। मुझे लगता है कि 2020 में बहुत कुछ बदल रहा है, और यह सही समय है सर्व सहमाति से लेखकों और निर्देशकों को वो सम्मान और श्रेय मिले जिसके वे हकदार हैं।