गीतकार Abhilash का 74 वर्ष की आयु में हुआ निधन

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Abhilash
Abhilash

मुंबई |गीतकार Abhilash का कल रात (27 सितंबर) को बॉम्बे में निधन हो गया। वह कैंसर से पीड़ित थे।आज सुबह 4.00 बजे उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया| अभिलाष का निधन गोरेगांव स्थित उनके घर पर ही हुआ है|कोरोना के चलते महज 15 से 20 लोग ही उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो पाये और ऐसे में बंगलुरू में रहने वाले उनकी बेटी और दामाद भी अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो सके|

अभिलाष ने फिल्म अंकुश (1986) के लिए प्रार्थना गीत इतनी शक्ति हमे देना दाता के साथ ही अन्य फिल्मों के लिए भी गीत लिखे थे |उनका यह प्रर्थना गीत आज भी उतना ही हिट था जितना की आज है |इस गाने को आज भी देशभर के कई स्कूलों और जेलों में प्रार्थना गीत के रूप में गाया जाता है| उल्लेखनीय है कि इस गाने का दुनिया की 8 भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है |वह राजश्री के सावन को जाने मत (1979) के गीत लेखकों में से एक थे, उन्होंने तेरे बिन सूना मोरे मन का मंदिर,आ रे आ रे आ लिखा था |

अभिलाष एक लेखक भी थे और उन्होंने 48 वर्षों तक इंडस्ट्री में काम किया था। उन्होंने युवा अवस्था में अपने करियर की शुरुआत की और वे गीत, गजल, शायरियां और नज्म लिखने में माहिर थे।उनके अन्य सुप्रसिद्ध गीतों में आज की रात ना जा और संसार है इक नदिया, ‘सांझ भई घर आजा’, ‘वो जो खत मुहब्बत में’, ‘तुम्हारी याद के सागर में’, ‘संसार है इक नदिया’, ‘तेरे बिन सूना मेरे मन का मंदिर’ आदि गीत शामिल है |

गीतों के अलावा Abhilash ने बतौर लेखक कई फिल्मों और टीवी सीरियल के लिए पटकथा और संवाद लिखे हैं |कई धारावाहिकों की स्क्रिप्ट पर काम किया था |अभिलाष के निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर छा गई है |