Exclusive : #Happy Birthday Amitabh Bachchan : ये है ” छोरा गंगा किनारे वाला “………

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Amitabh Bachchan
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अमिताभ बच्चन के 78 वे जन्मदिन पर ख़ास ………..


मार्वल्स के पास आयरनमैन है तो डीसी के पास बेट मैन-सुपर मैन है और करोड़ों हिन्दुस्तानियों के पास है उनका “एंग्री यंग मेन “।

“बरसात की एक रात में “जब कोई “लावारिस ” “चुपके चुपके” “अग्निपथ” के “शोले ” पार कर जाता है, तब ना कोई “दीवार ” उसे रोक सकती है ना कोई “जंजीर” उसे बांध सकती है और ना ही कोई “अंधा कानून” उसे गिरफ्तार कर सकता है। “खुदा गवाह” है कि ऐसा “मर्द” दुनिया मे “तूफान” की तरह आकर “मुकद्दर का सिकंदर” या “शहंशाह” बन जाता है। ऐसी ही एक हस्ती ने “खून पसीना” एक कर अभिनय का “जादूगर” बन सिनेमा जगत में “इंकलाब” ला दिया। सच तो यह है कि इस महानायक ने लोगों के दिलों में “मोहब्बते” जगाकर अपने अभिनय से लोगों को “निशब्द” कर दिया।ये तो कोई “अजूबा” ही कर सकता है और यह कर दिखाया है सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने।

अमिताभ के मुंबई में अपनी किस्मत आजमाने से अब तक की कहानी यही बयाँ करती है कि यदि व्यक्ति के हौसलों में उड़ान हो तो मंजिल मिल ही जाती है। यह वही अमिताभ बच्चन हैं जिन्हें ऑल इंडिया रेडियों से इसलिए निकाल दिया गया था क्योंकि उनकी आवाज मोटी थी और उसी मंत्रालय विभाग ने उन्हें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘‘पर्सनालिटी ऑफ द ईयर ’’पुरस्कार से सम्मानित किया। कवि हरिवंश राय बच्चन के घर जन्में और राष्ट्रकवि सुमित्रा नंदन पंत द्वारा सुझाए गए नाम अमिताभ ने देश-विदेश में अभिनय की ऐसी कविता रच डाली जिसकी आभा कभी नहीं मिटेगी।

बॉलीवुड के इस महानायक के लिए भी हिंदी सिनेमा में अपना स्थान बनाना आसान नहीं था।1969 में सात हिंदुस्तानी से शुरुआत करने के बाद जंजीर,आनंद,डॉन, कभी-कभी जैसी अनगिनत फिल्मों के साथ इनकी सफलता-असफलता का सिलसिला जारी रहा। इस दौर में ऐसे कई किरदार हैं जिन्हें अमिताभ ने पर्दे पर ना सिर्फ निभाया है बल्कि जिया भी है।

वैसे सफलता की इस दौड़ के बीच वह पल भी आये जब शूटिंग में हुई दुर्घटना ने उनकी रफ़्तार रोकी,लेकिन दशक के अंतराल के बाद अमिताभ ने अपनी जिद और समर्पण से यह साबित कर दिया कि सिनेमा और अमिताभ एक दूसरे के पूरक हैं।अमिताभ बहुत ही सहजता से खुद को उम्र के हिसाब से चारित्रिक किरदारों में ढालकर, अपनी ही छवि से आज़ाद महसूस कराते हुए चुनौतीपूर्ण और प्रयोगात्मक किरदार निभाते नजऱ आते हैं। अमिताभ ने पीकू’,‘पिंक’, ’आरक्षण’, ‘बागबान’, ‘पा’,‘सरकार’ ‘ब्लैक’ और ‘निशब्द’ जैसी फिल्मों से यह साबित कर दिया कि उम्र के अनुभव जिंदगी को मजबूत बनाते हैं।वास्तव में आने वाले दिनों में यह तय करना मुश्किल होगा कि उन्हें एंग्री यंगमैन के रूप में याद रखा जाए या जीवंत प्रौढ़ के रूप में।

अपनी जिंदगी कला को समर्पित कर यह शख्स हिन्दी सिनेमा के अंतहीन लगते दौर का केंद्र बन चुका है। अमिताभ एक मात्र ऐसे नायक हैं जिनकी स्वीकार्यता सर्वमान्य है।उनकी फिल्मों की कथाभूमि उन्हें ग्रामीण शहरी सर्वहारा से जोडती है तो संवेदना महिलाओं को छूती है। उनका सहज हास्य हर वर्ग को लुभाता है तो उनका संपूर्ण व्यक्तित्व और संवाद शैली उन्हें क्लास देता है।चाहे वो 70 के दशक का विजय हो,आज का सुभाष नागरे या ओरो इनके हर किरदार ने जनता का दिल जीता है। चाहे वो उनकी कॉमिक टाइमिंग हो या डांसिंग स्टाइल, उनकी जूनून से भरी एक्टिंग हो या गाने अपने अब तक के करिअर में नवरस का ऐसा कोई भाव नहीं जिसमें अमिताभ बच्चन ने महारथ हासिल ना की हो।

‘पद्मश्री’,‘पद्मभूषण’,‘पद्मविभूषण’ और ‘राष्ट्रीय पुरस्कार’ से नवाजा गया यह कलाकार आज कामयाबी के जिस अद्भुद शिखर पर है वहाँ किसी और का पहुँचना नामुमकिन सा लगता है। आज भी अमिताभ फिल्मों में अपनी शानदार अदायगी से इतिहास लिख रहे हैं।फिल्मों के साथ-साथ वे गायक, निर्माता और टीवी प्रिजेंटर भी रहे हैं। एक ओर जहाँ व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखते हुए उन्होंने ए.बी.सी.एल. नामक कंपनी की स्थापना की, वहीं ‘‘कौन बनेगा करोडपति’’ के द्वारा उन्होंने टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। ये जनमानस पर उनका गहरा प्रभाव ही है कि गुजरात टूरिज्म के ब्रांड एम्बेसेडर होने के साथ-साथ उन्होंने जनहित में पल्स पोलियो, एड्स, स्वच्छ भारत अभियान जैसी कई सरकारी योजनाओं के लिए भी सफल प्रचार किया।

वैसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी अमिताभ को यह सफलता विरासत में नहीं मिली इसके पीछे संघर्ष की एक लम्बी दास्ताँ है। इनकी इस कामयाबी के पीछे कई कहानियाँ,विवाद और उतार चढ़ाव रहे हैं पर हर संघर्ष से जूझते हुए शायद ही कोई और अभिनेता इतने उत्साह से काम कर पाया है। इस महानायक ने ना केवल लगातार बदलते परिप्रेक्ष्य में खुद को नए आयामों में ढाला बल्कि ना तो वह अपने प्रयासों में कभी थका और ना ही कभी हारा।अमिताभ बच्चन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एक अहम अदाकार ही नहीं बल्कि अपने अद्भुद व्यक्तित्व और जानदार आवाज के साथ स्वयं में एक प्रभावशाली शख्शियत हैं। अनगिनत चाहने वालों और अपार सफलताओं से भरा अमिताभ का जीवन उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की इन पंक्तियों को ही चरितार्थ करता हुआ नजऱ आता है-

     "तू न थकेगा कभी,तू न रुकेगा कभी,
     तू न मुड़ेगा कभी,
     कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
     अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ॥"