श्रद्धांजलि किशोर दा: आखिरी वक्त में लौटना चाहते थे #Khandwa, लेकिन… ऐसा हो नहीं सका

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Kishor Kumar Death Anniversary today

मुंबई। रूपहले पर्दे पर चमकने वाले सितारों की बात करें तो इनमें किशोर कुमार की पहचान सबसे चमकदार सितारों में से एक के तौर पर होती है। शानदार अभिनेता, सुरीले गायक, उम्दा निमार्ता निर्देशक, कुशल पटकथा लेखक और बेहतरीन संगीतकार के तौर पर किशोर को एक संपूर्ण कलाकार कहा जा सकता है। हर तरह के गीतों, चाहे वह दर्द भरे गीत हों या रूमानियत से भरे प्रेमगीत, हुल्लड़ वाले जोशीले नगमे हों या संजीदा गाने उनकी आवाज से बहुत से गीतों को यादगार बना दिया। उन्होंने हिंदी के अलावा और भी बहुत सी भाषाओं में गीत गाए। उनके अभिनय और निर्देशन को भी लाजवाब माना जाता है। हास्य अभिनय में किशोर कुमार अपने आप में अनूठे और बेजोड़ थे। इस महान कलाकार ने 13 अक्टूबर 1987 को इस दुनिया को अलविदा कहा।

पहले ही हो गया था अहसास
मुंबई ने किशोर कुमार को नाम, पैसा और शोहरत दिया, लेकिन वे कभी भी मुंबई को अपना नहीं पाए थे। वे मुंबई से ज्यादा खंडवा को अपने दिल के करीब मानते थे। 1986 में किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया। वे खंडवा लौट जाना चाहते थे लेकिन अपने आखिरी वक्त में वो वहां नहीं जा पाए। 13 अक्टूबर, 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। कहते हैं मौत से पहले उन्हें आभास हो गया था कि जल्दी ही वो दुनिया को अलविदा कहने वाले हैं।
किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘पापा में हार्ट अटैक संबंधी कुछ सिम्टम्स पहले से ही दिख रहे थे। एक दिन पापा ने मजाक किया कि अगर हमने डॉक्टर को बुलाया तो उन्हें सच में हार्ट अटैक आ जाएगा…और अगले ही पल उन्हें सच में अटैक आ गया’। बता दें कि किशोर कुमार के निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार खंडवा में ही हुआ।

8 फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड
किशोर कुमार ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक गाने दिए। उन्होंने गायकी के लिए आठ फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड जीता। इसके अलावा वे 27 बार इस अवॉर्ड के लिए नॉमीनेट हुए। किशोर कुमार जब फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे तब काफी लोगों को ऐसा लगा था कि ये गायक चल नहीं पाएगा। धीरे-धीरे जब उन्होंने बॉलीवुड में अपने पैर जमाए तब किशोर कुमार के प्रति लोगों की सोच बदली। किशोर कुमार ने हिंदी के अलावा बांग्ला, मराठी, गुजराती, आसामी, उड़िया, भोजपुरी और यहां तक कि कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी गाने गाए।

Kishor Kumar and Madhubala



चार शादियां, मधुबाला के लिए तो बन गए थे अब्दुल करीम
फिल्मी जिंदगी के अलावा किशोर दा अपने रिलेशनशिप को लेकर भी खबरों में बने रहते थे। उन्होंने चार शादियां की थीं। उनकी पहली शादी 1951 में अभिनेत्री रूमा गुहा से हुई थी। उन दिनों में किशोर दा बॉलीवुड के चर्चित नहीं थे। शादी के आठ साल के बाद साल 1958 में दोनों का तलाक हो गया। इसके पीछे की वजह मधुबाला थीं। शादीशुदा किशोर कुमार उन दिनों मधुबाला के प्यार में पड़ गए थे। जिस वक्त किशोर दा ने मधुबाला के सामने प्रस्ताव रखा उस वक्त वो अपना इलाज कराने विदेश जा रही थीं। किशोर दा ने रूमा को तलाक दिया और कुछ समय बाद मधुबाला से शादी रचा ली और साथ ही अपना धर्म बदलकर इस्लाम अपना लिया। किशोर दा ने अपना नाम बदलकर करीम अब्दुल रख लिया। हालांकि किशोर दा के परिवार वालों ने दोनों के रिश्ते को कभी नहीं स्वीकारा। किशोर दा की ये शादी भी सफल नहीं हो पाई। दिल में छेद होने के चलते मधुबाला का देहांत हो गया और किशोर दा अकेले रह गए। 
मधुबाला की मौत के बाद किशोर कुमार की जिंदगी में योगिता बाली आईं। इन दोनों के बीच पहले प्यार हुआ और फिर शादी। 1976 में दोनों की शादी रचाई। कुछ ही समय बीता था कि दोनों के बात बिगड़ना शुरू हो गई। 1978 में दोनों का तलाक हो गया। बाद में योगिता ने मिथुन चक्रवर्ती से शादी कर ली।
योगिता से तलाक के बाद किशोर की जिंदगी में अभिनेत्री लीना चंद्रावरकर की एंट्री हुई। चौथी और आखिरी बार 1980 में किशोर कुमार ने लीना से शादी की जिनसे उनको एक बेटा सुमित कुमार हैं। लीना और किशोर की उम्र में 21 साल का अंतर था। यही वो शादी थी जो किशोर दा के अंत तक टिक सकी। 

नुकसान दिखाने के लिए बनाई थी फिल्म… हो गई #Superhit
किशोर कुमार की फाइनेंशियली समझ जीरो थी, वो बड़े परेशान रहते थे, उनके मरने तक उन पर इनकम टैक्स के केसेज खत्म नहीं हुए। इन्हीं इनकम टैक्स के केसेज से बचने के लिए उन्होंने दो फिल्में प्रोडयूस करने का ऐलान कर दिया, एक बंगाली थी और दूसरी हिंदी की ‘चलती का नाम गाड़ी’ घर के लोगों को पैसा कम देते और बाद में फिल्मों में ज्यादा लॉस दिखा देते, ऐसा उनका आइडिया था, लेकिन मामला उलट गया। वो चाहते थे कि फिल्में फ्लॉप हों लेकिन ये फिल्म सुपरहिट हो गई। हालांकि बाद में किशोर भाइयों को लेकर एक और फिल्म लेकर आए, ‘बढ़ती का नाम दाढ़ी’ आज जिस तरह से गजनी का प्रमोशन होता है कि प्रीमियर में आमिर ने गंजों की फौज खड़ी कर दी थी, किशोर कुमार भी उस दौर में अपनी मूवी के प्रमोशन के लिए नायाब आइडिया लेकर आए थे। पूरी यूनिट प्रीमियर पर बढ़ी हुई दाढ़ियों के गैटअप में आई थी।

Chalti Ka naam Gaadi …