50 सुपर हिट फिल्में फिर ले लिया संन्यास… ऐसे थे यश जी

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Yash Chopra
Director and producer yash raj death anniversary today

मुंबई। 21 अक्टूबर 2012 का दिन। सिने प्रेमियों के लिए बड़ा झटका था। इस दिन दुनिया भर के चाहने वालों ने एक ऐसी शख्सित को खो दिया। जिसने बड़े पर्दे को नया आयाम देने के लिए दिन रात एक कर दिया। हम बात कर रहे हैं। अपने यश जी। यानि फिल्म डायरेक्टर, प्रोड्यूसर यश चोपड़ा की। उन्हें इस दुनिया से गए आज पूरे आठ साल बीत चुके हैं। भले ही शरीर से आज वो हमारे बीच नहीं हों, लेकिन अपनी बेहतरीन सदाबहार फिल्मों, उन फिल्मों के कर्णप्रिय संगीत और उनमें दर्शाई गर्इं खूबसूरत वादियों की चिरस्थाई सुमधुर स्मृतियों के जरिए वो सदैव हमारे बीच रहेंगे, हमारे साथ रहेंगे।

यश जी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बतौर सहायक अपने बड़े भाई और बेहतरीन फिल्म निर्माता बीआर चोपड़ा के साथ शुरू की थी। 1959 में आई ‘धूल का फूल’ बतौर सहायक, यश जी की पहली फिल्म थी लेकिन 1965 में आई सुपर डुपर हिट फिल्म ‘वक़्त’ ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। इस बहुचर्चित फिल्म ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए थे।

यशराज में राज आज भी कायम
1973 में यश जी ने राजेश खन्ना के साथ मिलकर ‘यशराज’ फिल्म्स की स्थापना की लेकिन ये साथ मात्र एक सुपरहिट फिल्म ‘दाग’ के बाद ही छूट गया। लेकिन विशाल हृदय के धनी यश जी ने ‘यशराज’ से राज को कभी अलग नहीं होने दिया। यशराज में राज आज भी कायम है।

‘यशराज’ बैनर के तले यश जी ने दूसरा आदमी, दीवार, कभी-कभी, त्रिशूल, काला पत्थर, नूरी, सिलसिला, मशाल, विजय, चांदनी, लम्हें, डर, दिल तो पागल है, फना, सलाम नमस्ते, मोहब्बतें, वीरजारा, धूम, धूम-2, जब तक है जान जैसी 50 सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। 2012 में यश जी ने फिल्म निर्देशन से संन्यास की घोषणा कर दी थी।

6 बार राष्ट्रीय पुरस्कार
सिने जगत में अप्रतिम-अद्वितीय योगदान के लिए यश जी को 6 बार राष्ट्रीय पुरस्कार, 4 बार फिल्म फेयर अवॉर्ड, दादा साहेब फाल्के सम्मान, पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया। यश जी की फिल्में न केवल मजबूत विषय-वस्तु पर आधारित होती थीं, कथा-पटकथा उनकी फिल्मों की जान होती थी।

करोड़ों दर्शकों के दिलों पर छोड़ते थे गहरी छाप
दीवार, कभी-कभी, त्रिशूल, काला पत्थर, सिलसिला, मशाल जैसी फिल्मों के जबर्दस्त डायलॉग्ज हों या सिलसिला, त्रिशूल, कभी-कभी, चांदनी, लम्हें, डर, फना, जब तक है जान की बेहद खूबसूरत वादियां, या फिर मनमोहक-कर्णप्रिय संगीत, फिल्मों पर यश जी की बारीक और गहरी पकड़, समझ, सृजनशीलता को बयां करते हैं। कथा-पटकथा, डायलॉग, फिल्मांकन, संगीत और कलाकारों के चयन से लेकर उनसे सर्वश्रेष्ठ अदायगी निकलवाने तक प्रत्येक क्षेत्र में यशजी की पैनी दृष्टि और क्रिएटिविटी, उनके साथ काम करने वाले तमाम लोगों से लेकर करोड़ों दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ते थे।