मैं अपने लिए एक जगह बनाने में कामयाब रही: भूमि पेडणेकर

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मुम्बई। प्रशंसित युवा एक्ट्रेस भूमि पेडणेकर ने ‘सांड की आंख’ (एसकेए) फिल्म के साथ एक बार फिर से दिखा दिया था कि अपने हुनर से प्यार करने के लिए वह रिस्क उठाने से नहीं डरती हैं। उन्होंने दबंगई के साथ दिखाया कि स्क्रीन पर जब भी वह आएंगी, किसी न किसी नए अवतार में प्रकट होकर दर्शकों को चौंकाने से कभी भी पीछे नहीं हटेंगी।

इस फिल्म में भूमि ने रियल लाइफ की महिला तीरंदाज चंद्रो तोमर का किरदार निभाया था, जो भारत की सबसे बुजुर्ग शार्पशूटर थीं और जिन्होंने अपनी बहन (यह भूमिका तापसी पन्नू ने निभाई) के साथ मिलकर भारत के लिए सफलता के झंडे गाड़े थे। अपनी क्रिटिकली एक्लेम्ड और कामयाब फिल्म की पहली वर्षगांठ के मौके पर भूमि बता रही हैं कि फिल्म में 60 साल की महिला बनने के लिए कितने गजब का चुनौतीपूर्ण काम उनके हाथ में था।

“मुझे लगता है कि जहां तक फिजिकल वर्क को लेकर कठिनाई होने की बात है, तो एसकेए में यह बहुत ज्यादा थी, क्योंकि मेक-अप स्पेशलाइज्ड था और ईमानदारी की बात यह है कि उस मेक-अप में रहना बड़ा कठिन था। उस अनुभव को याद करती हूं तो मेक-अप मेरी स्किन के लिए इस हद तक सख्त था कि मेरी स्किन वाकई झुलस गई थी और मुझे भारी एलर्जिक रिएक्शन झेलना पड़ा था! बॉडी लैंग्वेज को समझना और एक ऐसा किरदार निभाना, जो आपसे उम्र में बहुत बड़ा हो, हमेशा एक चैलेंज भी होता है। तो, मैं समझती हूं कि शारीरिक तौर पर यह किरदार मेरी अन्य तमाम फिल्मों के मुकाबिले ज्यादा मुश्किल था,”- मानना है इस वर्सेटाइल एक्ट्रेस का।

अपनी बात को विस्तार देते हुए भूमि कहती हैं, “इमोशनल तौर पर एसकेए मेरे लिए सबसे अजनबी फिल्मों में से एक है, क्योंकि मैं अपनी लाइफ में उन भावनाओं से कभी दो-चार नहीं हुई थी। यह बड़ी ताजगी देने वाली फिल्म थी और मुझे लगता है कि वह किरदार निभाना मेरे लिए एक तरह का आध्यात्मिक शुद्धिकरण भी था, क्योंकि वे दादियां अपनी लाइफ में बहुत कुछ कर गुजरी थीं, अपनी कम्युनिटी के लिए उन्होंने बहुत कुछ हासिल करके दिखा दिया था।

उन पर हर कोई अपनी जान छिड़कता है और एसकेए जैसी फिल्म के सहारे सेल्युलॉयड पर उनकी लाइफ के विभिन्न पहलुओं को दिखाना एक बेहद खास पल बन जाता है। हम कोई खूबसूरत सी चीज बनाने की कोशिश कर रहे थे। इस फिल्म पर अपना प्यार बरसाने के लिए मैं लोगों का शुक्रिया अदा करती हूं। तुषार, तापसी, निधि, रिलायंस, पूरी कास्ट और मेरे बीच अद्भुत तालमेल था।“

भूमि इस बात को लेकर खुश हैं कि अपनी प्रोग्रेसिव, तीखी, क्लटर-ब्रेकिंग फिल्मों और भूमिकाओं के जरिए अब मेनस्ट्रीम सिनेमा के तौर पर देखे जा रहे सिनेमा की परिभाषा बदलने की दिशा में उन्होंने योगदान दिया है। “मुझे नहीं पता कि मेरा सिनेमा ऑफ बीट है या नहीं। यकीनन मैं महसूस करती हूं कि मेनस्ट्रीम सिनेमा की परिभाषा बीते 5 सालों के दौरान काफी हद तक बदल चुकी है, जिसके लिए मेरी फिल्मों ने अपना योगदान दिया है। इस बात को लेकर मैं बहुत खुश हूं क्योंकि आर्टिस्ट यही करने के लिए बने होते हैं,”- वह कहती हैं।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इस यंग एक्ट्रेस ने कहा, “मुझसे पहले अनेक शानदार एक्टरों ने भी इस बदलाव का रास्ता बनाने की दिशा में जबरदस्त काम किया था, लेकिन सो-कॉल्ड अपरंपरागत सिनेमा ने अब एक खास रफ्तार पकड़ ली है, जो इतनी फ्रीक्वेंसी में पहले देखने को नहीं मिलता था। मेरा मानना है कि आजकल दर्शक ऐसी फिल्मों की तलाश में रहते हैं, जो मनोरंजक होने के साथ-साथ कंटेंट के लिहाज से भी जानदार हों, और मुझे लगता है कि मेरी फिल्में उनकी यह ख्वाहिश पूरी करती हैं। तो, मैं इसके व अपने लिए एक जगह बना पाने में कामयाब रही हूं और अपनी इस कामयाबी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देती हूं।“- इतना कह कर भूमि अपनी बात समाप्त करती हैं।