Bhumi Pednekar के एक्टिंग में करियर बनाने का यह है कारण !

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Bhumi Pednekar
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मुंबई | बॉलीवुड स्टार भूमि पेडणेकर हाल ही में पड़े परदे पर धमाल मचाने वाली सबसे रोमांचक युवा प्रतिभाओं में शामिल हैं। अपनी पांच साल की सिनेमैटिक यात्रा के दौरान भूमि ने- ‘दम लगा के हईशा’, ‘टॉयलेट: एक प्रेमकथा’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘सांड की आंख’, ‘सोनचिरैया’, ‘पति, पत्नी और वो’, ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’- जैसी फिल्मों में असाधारण प्रदर्शन करके हमारा मनोरंजन किया है।

यंग एक्ट्रेस भूमि खुलासा कर रही हैं कि उन्होंने एक्टिंग में ही करियर बनाने का फैसला क्यों किया था और उनका आगे का सफर कैसा रहा!

भूमि बताती हैं, “पांच साल बीत चुके हैं और मुझे अभी भी यह किसी सपने जैसा लगता है! मैं कोई एक्सीडेंटल एक्टर नहीं हूं और इसे मैं बार-बार दोहराती हूं। यह एक ऐसी चीज है, जिसे सचमुच मैं करना चाहती थी और एक्टिंग की दुनिया में दाखिल होने के लिए मैंने वाकई बेहद कड़ी मेहनत की है। मेरी पैदाइश और परवरिश मुंबई में हुई है, इसका यकीनन मुझे फायदा हुआ क्योंकि अपनी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के शहर में आपके पास किसी किस्म का सपोर्ट सिस्टम मौजूद होना आपके सफर को थोड़ा आसान बना देता है।

इसके बावजूद, चूंकि मेरा किसी ट्रैडीशनल फिल्म फेमिली से ताल्लुक नहीं था या इंडस्ट्री में वाकई मेरा किसी से सम्पर्क नहीं था, तो फिल्मों में कदम रखने को लेकर पहले पहल मैं बड़ी कन्फ्यूज थी।“

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह वर्सेटाइल एक्ट्रेस कहती है, “सबसे पहले तो मैं इसी बात की हिम्मत जुटा रही थी कि पैरेंट्स को अपने एक्ट्रेस बनने को लेकर कैसे राजी करूं। आखिरकार मैंने अपने पैरेंट्स से इसके बारे में बात करने की हिम्मत जुटा ही ली। मेरे इस फैसले से वे ज्यादा खुश नहीं थे और मुझे लगता है कि उनका यह रवैया मेरे प्रति प्रोटेक्टिव होने की वजह से था। तो मैंने फिल्म स्कूल ज्वाइन करने का फैसला किया जिसकी फीस बहुत ज्यादा थी, नतीजतन मुझे एक लोन लेना पड़ा।“

भूमि को आज हमारी जनरेशन की बेस्ट एक्ट्रेसेस में गिना जाता है, लेकिन भूमि बताती हैं कि वह किस तरह से फिल्म स्कूल में फेल हो गई थीं और इसने उन्हें वाकई अंदर तक हिला कर रख दिया था। उन्हीं के शब्दों में पढ़िए- “मैं फिल्म स्कूल में इसलिए फेल नहीं हुई थी कि मैं कोई बुरी एक्ट्रेस थी, बल्कि पर्याप्त अनुशासित न होने की वजह से फेल हुई थी और मेरे लिए यह सबसे तगड़ा झटका था! मुझे लगा कि मुझसे भयंकर गड़बड़ी हो गई है, इसके अलावा मेरे सिर पर 13 लाख रुपए के लोन का बोझ था, जो बहुत बड़ी रकम थी। मैंने अपने सर्वाइवल और एक्टिंग के सपने को जिंदा रखने के लिए नौकरी की तलाश शुरू की। एक बार फिर से पैरेंट्स मेरे जॉब करने के पूरी तरह खिलाफ हो गए और वे चाहते थे कि मैं पढ़ाई की तरफ लौटूं। लेकिन मैंने उनसे कह दिया था कि मैं किसी ओपन स्कूल से कोई न कोई डिग्री हासिल कर लूंगी।“

इसके बाद इस टैलेंटेड एक्ट्रेस ने कास्टिंग सहायक के तौर पर वाईआरएफ ज्वाइन कर लिया। वह खुलासा करती हैं- “जब मैं वहां कास्टिंग किया करती थी तो मेरा इरादा यह जानकारी हासिल करने का नहीं होता था कि मैं फिल्म एक्ट्रेस बन सकती हूं या नहीं। मैं वहां एक फिल्म मेकिंग स्टुडेंट की तरह सिर्फ ऑब्जर्व किया करती थी। उन दिनों मेरी कैफियत कुछ ऐसी हुआ करती थी कि मैं इस दुनिया का हिस्सा बनना चाहती हूं और जो भी दरवाजा खुलेगा, मैं उसमें दाखिल हो जाऊंगी! दरअसल मेरी जिंदगी कुछ ऐसी ही रही है- यह सर्वाइवल का सफर था। ‘दम लगा के हईशा’ से पहले गुजरे तमाम साल मैंने केवल किसी तरह से सर्वाइव कर जाने की कोशिश की। मैं भाग्यशाली रही कि मेरी झोली में मौके आते गए- एक के बाद एक चीजें घटित होती रहीं। मुख्य तौर पर यह सिलसिला वाईआरएफ से शुरू हुआ था।“