Happy Birthday : किंग खान ने पूरे किए 55 साल

■ Guest Writer- SHISHIR

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1988 में छोटे पर्दे यानी कि टेलीविज़न से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाले शाहरुख़ अपनी अदाकारी की दम पर दुनियां भर के सिनेप्रेमियों की चाहत का रूख अपनी ओर मोड़ लेंगे ये तो शायद ख़ुद शाहरुख़ ने भी नहीं सोचा होगा।’सैन्योरीटा, बड़े-बड़े देशों में छोटी-छोटी बातें… यू नो व्हाट आय मीन’, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुँह से ‛दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे’ का ये डायलॉग सुनकर सभी लोग उस समय ख़ुशी से आश्चर्यचकित, हतप्रभ रह गए थे। जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जनवरी 2015 में भारत दौरे पर आए थे, शाहरुख की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है। अमेरिका, सऊदी समेत यूरोप के अनेक देशों में भी शाहरुख़ बेहद लोकप्रिय हैं।

शाहरुख़ ने अभिनय की शुरुआत 1988 में दूरदर्शन के धारावाहिक ‛फ़ौजी’ से की थी उसके बाद 1989 में आए अजीज़ मिर्ज़ा के ‛सर्कस’ और उसके बाद ‛दूसरा केवल’ में अपनी दमदार अदाकारी से लोगों के दिलों-दिमाग़ पर छा गए। उसके बाद शाहरुख़ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफ़लता के परचम देश भर में ही नहीं, विदेशों तक लहरा दिए।

शाहरुख़ का प्रारम्भिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा और सबसे बड़ी बात ये कि जिन्दग़ी में उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया, सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने बलबूते पर। टीवी या फ़िल्मों में उनका कभी भी कोई ‘गॉड फ़ादर’ नहीं था। शाहरुख़ के पिता ताज़ मोहम्मद ख़ान स्वतन्त्रता सेनानी थे और माता भी ‘फ़ौजी’ की बेटी थीं। शाहरूख़ बेहद होनहार विद्यार्थी होने के साथ-साथ खेलों-कला के क्षेत्र में भी निपुण रहे हैं।

अपने माता-पिता को जल्दी खो देने के बाद शाहरुख़ अपनी बड़ी बहन शहनाज़ को लेकर बम्बई आ गए।

कड़े संघर्ष के बाद हासिल हुई अपनी पहली ही फ़िल्म ‛दीवाना’ में बेहतरीन अदाकारी के लिए शाहरुख़ को ‛फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया। उसके बाद बाज़ीगर, डर, कभी हाँ कभी ना ने तो एक के बाद एक सम्मानों और पुरस्कारों की झड़ी लगा दी।

उसके बाद 1995 में आई ‛दिलवाले दुल्हनियाँ ले जाएँगे’ शाहरुख़ की अब तक की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म मानी जाती है, जिसने सफ़लता के अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए। मुम्बई के ‛मराठा मन्दिर’ में ये फ़िल्म रिलीज़ से लेकर आज तक अनवरत यानी 25 साल से चल रही है। इस फ़िल्म के लिये भी शाहरुख़ ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ‘फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड’ हासिल किया। 1997 में आई यश चोपड़ा की ‛दिल तो पागल’ है और अज़ीज़ मिर्ज़ा की ‛यस बॉस’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों में शाहरुख़ के अभिनय को भरपूर सराहना मिली। 1998 में आई करण जौहर की फ़िल्म ‛कुछ कुछ होता है’ साल की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म साबित हुई और इस फिल्म के लिये भी शाहरुख़ को ‛फ़िल्म फेयर अवॉर्ड’ मिला। इसी साल आई मणिरत्नम की फ़िल्म ‛दिल से’ में शाहरुख़ के बेहतरीन अभिनय को देश-विदेशों में भरपूर सराहा गया। ‛फिल्टी स्टारर फ़िल्म ‛कभी ख़ुशी कभी गम’ 2001 की सबसे बड़ी हिट साबित हुई तो 2002 में संजय लीला भंसाली की ‛देवदास’ में शाहरुख को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये एक फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के ‘फ़िल्म फ़ेयर अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया।

वैसे तो राजू बन गया जेंटलमैन, चमत्कार, राम जाने, जोश, चाहत, हम तुम्हारे हैं सनम, फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, चलते-चलते, कल हो ना हो, वीरजारा, मैं हूँ ना, स्वदेश, डॉन-1 और 2, चख दे इण्डिया, रब ने बना दी जोड़ी, दिलवाले, चेन्नई एक्सप्रेस, रईस, जब तक है जां, अनेक सुपरहिट या वो फ़िल्में हैं जिन्होंने या तो सफ़लता झण्डे गाढ़े या जिनमें शाहरुख़ अपने शानदार अभिनय से लोगों के दिलों पर छा गए।

बाज़ीगर, डर और अंजाम में शाहरुख ऐसे ख़लनायक बने जिसने ख़लनायक के क्रूर क़िरदार में भी लोगों की जमकर सहानुभूति और वाहवाही बटोरी, और डर में तो नायक-नायिका से भी ज़्यादा।

कुल 14 फिल्म फेयर अवॉर्ड से सम्मानित होने वाले शाहरुख़ को 8 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाज़ा गया, उनसे पहले या उनके अलावा ये सम्मान केवल ‘अभिनय सम्राट’ दिलीप कुमार को ही हासिल है। कला के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए 2005 में शाहरुख़ को ‛पद्मश्री’ सम्मान हासिल हुआ।

आज 2 नवम्बर को अपने जीवन के शानदार गौरवशाली 55 वर्ष पूर्ण करने वाले ‘बॉलीवुड के बादशाह’ और ‛किंग खान’ शाहरुख खान को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं।