Birthday स्पेशल: मिनटों में जादुई धुन बनाने में माहिर थे लक्ष्मी कांत जी

■ डॉ. देवेंद्र शर्मा की कलम से...

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अपने समय में हिट संगीत का पर्याय बन चुकी संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के लक्ष्मीकांत शांताराम कुडालकर जी को उनकी जन्म तारीख पर विनम्र अभिवादन व श्रद्धांजलि। 3 नवम्बर 1937 को जन्मे लक्ष्मीकांत निपुण मेंडोलिन वादक और मिनटों में जादुई धुनें बनाने में दक्ष थे। अद्वितीय कम्पोज़र प्यारेलाल जी जब जुबिन मेहता या यहूदी मेन्युहिंन की तरह अपना कैरियर बनाने विदेश जाने की योजना बना रहे थे, लक्ष्मीजी ने उन्हें जोड़ी बनाकर यहीं फिल्मों में संगीत देने के लिए राज़ी कर लिया और इस जोड़ी ने क्वालिटी और क्वान्टिटी का वह ज़बरदस्त अध्याय बनाया, जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका।

अपनी पहली ही फ़िल्म ‛पारसमणि’ से तूफान ला देने वाली इस जोड़ी ने हर बड़े प्रोड्यूसर के साथ काम किया। इनकी, हिट संगीत से लबरेज़ करीब साढ़े सात सौ फिल्मों में सभी का नाम लिखना अभी संभव नहीं, फिर भी दोस्ती,हाथी मेरे साथी,बॉबी, सत्यम शिवम सुंदरम, प्रेमरोग, रोटी कपड़ा और मकान, दाग, क्रांति, नागिन, जानी दुश्मन, सरगम, फ़र्ज़, आशा, कर्ज़,रामलखन, नगीना,  सुहाग,अमर अकबर एंथोनी, नसीब, कुली, हीरो, उत्सव, एक दूजे के लिए, प्यार झुकता नहीं, गुलामी, सौदागर, कर्मा, नाचे मयूरी, खलनायक, मि. इंडिया,
तेज़ाब और हम, इनके विविधता भरे संगीत की आश्चर्यकारी बानगी है।

जयकिशन की फैशनेबल ड्रेस स्टाइल को अपना आदर्श मानने वाले लक्ष्मीकांत शोख, व्यवहार कुशल, बातूनी, और युग की मांग समझकर संगीत रचने वाले संगीतकार रहे। इसीलिए “एलपी” को ट्रेंडसेटर संगीतकार भी कहा जाता है। लक्ष्मीजी के जाने के बाद प्यारेजी पूरी तरह देश विदेश में स्टेज शोज़ पर केंद्रित हो गए हैं। उनका मानना है कि लक्ष्मी की उपस्थिति को मैं हमेशा अपने साथ महसूस करता हूँ, क्योंकि हम अभिन्न हैं। सगे भाइयों से भी बढ़कर इस जोड़ी के अनगिनत यादगार गीत ये ज़माना सदियों तक गुनगुनाएगा।

एक प्यार का नग़मा है,
मौजों की रवानी है।
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं,
तेरी मेरी कहानी है।