Nadira Birth Anniversary: एक यहूदी लड़की का हिन्दू ‛रिवाजों’ में रच-बस जाने का नाम था Nadira

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Actress Nadira
Actress Nadira

BolBolBollywood.com, स्पेशल स्टोरी, (Nadira)नादिरा यानि फ्लोरेंस एजेकेल। 5 दिसंबर 1932 को इराके शहर बगदाद में जन्म हुआ। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 1952 में महबूब खान की ‘आन’ से अपने करियर की शुरूआत करने वाली नादिरा (Nadira)का निधन 9 फरवरी 2006 को हो गया था। एक यहूदी परिवार में जन्म लेने के बावजूद हिन्दू रीति रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया था। जिस आखिरी फिल्म में वह नजर आई थीं वह थी मंसूर खान की वर्ष 2000 में रिलीज हुई ‘जोश’। पचास और साठ के दशक में नादिरा की शोहरत आसमान पर थी और राजकपूर की ‘श्री चार सौ बीस’ के एक गाने के बाद से तो उन्हें ‘मुड़ मुड़ के न देख गर्ल’ ही कहा जाने लगा था। दरअसल, एक बार(Nadira) नादिरा ने कहा था कि लंच ब्रेक के दौरान में म्यूजिक रूम में नाच रही थी। राज कपूर की बेटी ऋतु पियोना बजा रही थी। उन्होंने आन, श्री चार सौ बीस, दिल अपना और प्रीत पराई, पाकीजा, जूली, सागर, तमन्ना जैसी 63 फिल्मों में काम किया।

Nadira wirh Raj Kapoor

एक शादी ने तय कर दिया मुकद्दर
दरअसल, महबूब खान देश की पहली रंगीन फिल्म आन(1952) बना रहे थे। फिल्म की एक हीरोइन, निम्मी, मिल गई थी। दूसरी के लिए नरगिस और मधुबाला में से एक को लिया जाना था, जो संभव नहीं हुआ। जब बगदाद से एक शादी में भारत आर्इं 16-17 साल की फ्लोरेंस एजेकेल को एक दिन महबूब खान ने अपनी फिल्म की हीरोइन बनाया, तो फ्लोरेंस की मां को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने जब कहा कि फिल्मों में काम करना बुरा माना जाता है और अब (Nadira) नादिरा सिनेगांग (यहूदी पूजा स्थल) नहीं जा सकेंगी और कोई यहूदी उनसे शादी नहीं करेगा, तब नादिरा (Nadira) ने कहा कि फिलहाल तो हमारी बुनियादी जरूरत शाम के खाने का इंतजाम करना है। फिल्मों में काम करना बुरा है, तो भूखा मरना उससे ज्यादा बुरा है।

नया नाम और 1200 रुपए महीना सैलरी
दरअसल, फ्लोरेंस भारत आ कर बहुत खुश थीं। महबूब खान की पत्नी सरदार अख्तर ने फ्लोरेंस को स्टारों की तरह रहना सिखाने की कई दिनों तक कोशिश की मगर यह फ्लोरेंस के मिजाज में नहीं था। महबूब खान ने फ्लोरेंस को एक नया नाम (Nadira)नादिरा देकर 1200 रुपए महीने पर आन के लिए साइन किया था। जब तीन महीने की 3600 रुपए तनख्वाह एक साथ मिली, तो नादिरा (Nadira) ने कहा कि इतना पैसा लेकर वे घर अकेली नहीं जा सकतीं। उनकी सुरक्षा का इंतजाम किया जाए। मां-बेटी ने जीवन में इतनी बड़ी रकम पहली बार देखी थी। लिहाजा पहले तो कई दिनों के बाद दोनों ने भरपेट खाना खाया। फिर चोरी के डर के मारे दोनों रात भर जागती रहीं। अगले दिन सबसे पहले उन्होंने सोने का एक सेट खरीदा और घर का फर्नीचर लिया।

पहली ही फिल्म ने तोड़ दिए कमाई के रिकॉर्ड
आन (1952) ने कमाई के रिकॉर्ड बनाए। यह पहली फिल्म थी, जो 17 भाषाओं के सब टाइटल्स के साथ 28 देशों में रिलीज हुई थी। लंदन में फिल्म का प्रीमियर हुआ। इसी प्रीमियर पर वह मशहूर घटना भी घटी थी, जब हॉलीवुड के मशहूर हीरो एरोल फ्लीन ने आन की हीरोइन निम्मी के हाथ का चुंबन लेना चाहा था और निम्मी ने उनसे कहा था कि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि मैं एक भारतीय लड़की हूं।(Nadira) नादिरा भी रातोरात स्टार बन गर्इं।

सिगरेट पकड़ने का अंदाज आज भी…
फिर नादिरा (Nadira) को मिली राज कपूर की श्री 420 (1956) जिसमें उनके सिगरेट पकड़ने के अंदाज को बाद में कई हीरोइनों ने दोहराने की विफल कोशिशें की। इस फिल्म में सिगरेट पकड़ने के उनके अंदाज ने उनके करियर की दिशा बदल ली। फिल्म तो खूब चली मगर खल भूमिका होने के कारण नादिरा (Nadira) के पास हीरोइन के प्रस्ताव आने बंद हो गए। कई महीनों तक काम नहीं मिला, तो हार कर नादिरा खलनायिका की भूमिकाएं ही करने लगीं। इस दौरान भारत नादिरा की रगों में बड़ी खामोशी से बसता गया था। उनके निधन पर बीसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष रहे पीएम रूंगटा ने उनकी वसीयत सार्वजनिक की थी- नादिरा ने यहूदी होने के बावजूद खुद को दफनाने के बजाय हिंदू रीतिरिवाजों से जला कर अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई है। मामला संवेदनशील था। लिहाजा यहूदियों की द शेपर्डी फेडरेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष सोलोमन एफ सोफर को सार्वजनिक बयान जारी करना पड़ा कि उनकी इच्छा तो नादिरा(Nadira) को यहूदी परंपरा के मुताबिक दफनाने की है मगर नादिरा ऐसा नहीं चाहती थीं।