IPAB ने द इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी के पक्ष में सुनाया ऐतिहासिक फैसला  

The Intellectual Property Appellate Board (IPAB) makes a landmark judgement 

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मुंबई। बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) द्वारा कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत गठित विशेषज्ञ न्यायाधिकरण ने 31 दिसंबर 2020 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले इस न्यायाधिकरण में तकनीकी सदस्य एन सूर्या सेंथिल एवं  एसपी चोकलिंगम शामिल थे। इस फैसले में द इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी  (IPRS) तथा उनके गीतकार, संगीतकार और म्यूज़िक पब्लिशर्स सदस्यों के अधिकारों को बरक़रार रखा गया है और अब आईपीआरएस को अपने सदस्यों की ओर से भारत में एफएम रेडियो स्टेशनों द्वारा गीत, संगीत एवं इसमें अंतर्निहित साउंड-रिकॉर्डिंग के प्रसारण के संबंध में रॉयल्टी का दावा करने का अधिकार मिल गया है।
 
यह निर्णय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 में 2012 के संशोधन के आधार पर गीतकारों और संगीतकारों द्वारा रॉयल्टी का दावा करने के अधिकारों को मान्यता देता है। इस निर्णय के जरिए साउंड रिकॉर्डिंग के साथ-साथ साहित्यिक एवं संगीत रचनाओं के संबंध में वर्ष 2021 से पूरे भारत में रेडियो प्रसारण स्टेशनों द्वारा भुगतान की जाने वाली अलग-अलग रॉयल्टी दरों का निर्धारण भी किया गया है।
 
आईपीएबी में होने वाली इस कानूनी कार्यवाही में देश के सभी प्रमुख एफएम रेडियो कंपनियों, म्यूजिक कंपनियों और आईपीआरएस जैसी कॉपीराइट सोसायटी ने भाग लिया, ताकि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के वैधानिक लाइसेंस प्रावधान के तहत रेडियो प्रसारण के लिए रॉयल्टी की दरों का निर्धारण किया जा सके।
 
आईपीआरएस के बोर्ड और उसके सभी सदस्यों की ओर से आईपीआरएस के अध्यक्ष जावेद अख़्तर (Javed Akhtar) ने आईपीएबी के इस फैसले का स्वागत किया। श्री अख़्तर ने कहा , ‛इस ऐतिहासिक फैसले ने गीतकारों और संगीतकारों जैसे रचनाकारों के अधिकारों को मान्यता प्रदान की है, साथ ही गीत और संगीत के किसी भी रूप में उपयोग से रॉयल्टी में बराबर हिस्सेदारी पाने का क़ानून लागू किया है। इस फैसले के बाद, अधिकारों से वंचित एवं आर्थिक रूप से कमज़ोर रचनाकारों और उनके परिवारों के साथ-साथ देश-विदेश में मौजूद रचनाकारों के पूरे समुदाय को बहुत फायदा होगा। रचनाकारों के अधिकारों को क़ानून के अनुरूप साफ़ और स्पष्ट तौर पर मान्यता देने के लिए हम माननीय आईपीएबी को तहे दिल से धन्यवाद देते हैं, और आशा करते हैं कि रेडियो प्रसारण के क्षेत्र में हमारे सहयोगी अब इस निर्णय को ध्यान में रखते हुए रचनाकारों के समुदाय के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।
 
आईपीआरएस के सीईओ राकेश निगम ने कहा, ‛इस फैसले से बुनियादी तौर पर एक बड़ा बदलाव आएगा, जो भारत में रचनाकारों के समुदाय को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए आईपीआरएस का मार्ग प्रशस्त करेगा।आईपीआरएस की टीम इस फैसले से बेहद संतुष्ट है, और हमें इस बात पर बेहद गर्व हो रहा है कि आईपीआरएस इकलौती ऐसी पंजीकृत कॉपीराइट सोसायटी थी जिसने माननीय आईपीएबी के समक्ष लेखकों, गीतकारों एवं संगीतकारों और म्यूज़िक पब्लिशर्स के हितों का प्रतिनिधित्व किया।’
 
 
गौरतलब है कि आईपीआरएस भारत में कॉपीराइट प्रदान करने वाली एकमात्र संस्था है, जो कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत पंजीकृत है और यह संस्था लेखकों, संगीतकारों एवं म्यूज़िक पब्लिशर्स का प्रतिनिधित्व करती है। भारत के 5,500 से अधिक मशहूर लेखक, संगीतकार और म्यूज़िक पब्लिशर्स इसके सदस्य हैं। आईपीआरएस को कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत अपने सदस्यों द्वारा सौंपी गई संगीत रचनाओं से संबंधित संगीत कार्यों एवं साहित्यिक कार्यों के संदर्भ में लाइसेंस जारी करने और प्रदान करने का अधिकार दिया गया है।