Tiranga के 28 साल: राजकुमार के साथ काम को लेकर कोई नहीं था तैयार, इस शर्त पर नाना पाटेकर ने दी रजामंदी

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BolBolBollywood.com, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों में से एक राज कुमार (Raaj Kumar) और नाना पाटेकर (Nana Patekar) अभिनीत फिल्म ‛तिरंगा’ (Tiranga 1993) के  29 जनवरी को 28 साल पूरे हो चुके हैं। यह फिल्म साल 1993 में रिलीज की गई थी। जो बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट रही। फिल्म में राजकुमार की लाजवाब डॉयलॉग डिलेवरी और नाना पाटेकर बेहतरीन अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आया। इसके निर्माता-निर्देशक मेहुल कुमार थे। जबकि संगीत लक्ष्मी कांत-प्यारे लाल का था। 163 मिनट की इस फिल्म में वर्षा उसगांवकर, ममता कुलकर्णी, हरीश कुमार, दीपक शिर्के और मनोज सिंह की प्रमुख भूमिकाएं थी। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म (Tiranga 1993) में 8 गाने है। इन्हें मोहम्मद अजीज, सदेश भोंसल, साधना सरगम, कविता कृष्णूर्ति, उदित नारायण जैसे फनकारों ने आवाजें दी है। मोहम्मद अजीज और सुदेश भोंसले की ‘पी ले पी ले ओ मेरे राजा’ खासा चर्चित रहा है। वहीं, अन्य गीतों में ओये रब्बा मेरी जान बचा ले, ये आन तिरंगा है, इसे समझो न रेशम का तार, ये आन तिरंगा है (संस्करण 2), मोहम्मद अजीज, आज की शाम प्यार करने, जाने मन जाने मन शामिल है।

दरअसल, फिल्म के डायरेक्टर मेहूल कुमार (Mehul Kumar) ने एक बार बताया कि ‘तिरंगा’ में राजकुमार और नाना पाटेकर के साथ आने की कहानी भी खूब है। दरअसल, राजकुमार के रौबीले और अनुशासित व्यक्तित्व की वजह से कई कलाकार उनके साथ काम करने से बचते थे। इसी वजह से फिल्म में इंस्पेक्टर शिवाजी राव वागले के किरदार के लिए जिसको कहानी सुनाता था, वही मना कर देता था।

मेहूल ने बताया कि, ‘सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह (Nasir uddin Shah) के पास गया। उन्होंने कहा- मेहुल भाई आपके साथ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन राज साहब के साथ तो काम करने से रहा। फिर रजनीकांत (Rajnikanth) से बात की। उन्होंने कहानी सुनने के बाद कहा कि आपने किरदार को मेरा ही असली नाम शिवाजीराव दिया है, लेकिन मेहुल जी, मुझे एक ही प्रॉब्लम है- राज साहब के साथ कैसे काम कर पाऊंगा। कुछ सेट पर टेंशन हो गई, तब क्या करूंगा। मुझे माफ कर दो।’ अतत: जब कही बात नहीं बनी तो नाना पाटेकर को फोन किया, तब उन्होंने यह कहते हुए तपाक से मना कर दिया कि, कमर्शियल फिल्में मैं नहीं करता।’ लेकिन, कोई आॅप्शन नहीं था उन्हें मनाने के अलावा। आखिरकार जैसे तैसे उन्हें एक शर्त पर राजी किया गया कि अगर राज साहब इंटरफेयर करेंगे तो मैं सेट छोड़कर चला जाऊंगा। यह बात जब राजकुमार साहब को बताई गई तो उन्होंने कह दिया कि अरे मेहुल, सुना है वह सेट पर गाली गलौज कर देता है। उसका दिमाग खराब रहता है। फिर भी, तुम आगे बढ़ो। इसके बाद 6 महीने में ही यह फिल्म पूरी हो गई थी।

मैंने (मेहूल कुमार) उन्हें जैसे-तैसे राजी किया और राज साहब को फोन करके बताया कि वागले फाइनल हो गया। उन्होंने पूछा- ‘कौन कर रहा है?’ मैंने कहा- नाना पाटेकर। वे कहने लगे- ‘अरे मेहुल! उसका दिमाग बहुत खराब रहता है,। सुना है कि वह सेट पर गाली-गलौज कर देता है।’ मैंने कहा- राज साहब मैंने सारी चीजें क्लियर कर ली हैं। बस वह यह बोला कि, राज साहब सेट पर इंटरफेयर करेंगे, तब मैं सेट छोड़कर चला जाऊंगा। राज साहब केवल एक शब्द बोले- ‘मेहुल! गो अहेड।’ इसके बाद 6 महीने में यह फिल्म कंप्लीट होकर रिलीज हुई।