50 Years: जैसे शाहजहाँ ने ताज बनवाया था, वैसे ही कमाल अमरोही में Meena Kumari के लिए बनाई थी Pakeezah

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Pakeezah movie

BolBolBollywood.com, स्पेशल, स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड में ऐसी गिनी चुनी फिल्में ही बनी हैं जो कई दशकों तक हमारे दिलों में राज करती हैं। 4 फरवरी 1972 को रिलीज पाकीजा (Pakeezah) भी ऐसी ही एक फिल्मों में से एक है। फिल्म का शायराना अंदाज, दिल को छू लेने वाले संवाद और मदहोश कर देने वाला संगीत हमें उस दौर में जाता है, जब यह फिल्माई गई थी। मुगल-ए-आजम के बाद यह हिंदी सिनेमा की दूसरी फिल्म थी जिसे बनाने में 14 साल जितना लंबा वक्त लग गया।

बताया जाता हैं कि जब पाकीज़ा बनाने का फैसला लिया गया तब निर्देशक कमाल अमरोही अभिनेता अशोक कुमार (Actor Ashok Kumar) के किरदार में देखना चाहते थे। लेकिन, लंबा वक्त बात जाने के बाद कमाल अमरोही ने धर्मेंद्र, राजेंद्र कुमार या सुनील दत्त को कास्ट करने का सोचा। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आखिर कार यह फिल्म राजकुमार (Raaj Kumar) की झोली में चली गई। यहाँ फिल्म में थोड़ा चेंज किया गया क्योंकि राजकुमार का बिजनेस मैन वाला किरदार उनकी पर्सनालिटी से मैच नहीं खाता था। इसलिए इसे बदलकर एक फॉरेस्ट कर्मी में बदल दिया गया और उनके चाचा शहाबुद्दीन की भूमिका में अशोक कुमार को लिया गया। इस फिल्म का सबसे यादगार संवाद ‛आपके पांव देखे, बहुत हसीन हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा, मैले हो जाएंगे’ हिंदी सिनेमा के अमर संवादों में से एक है। बताया जाता है पहले मूल स्क्रिप्ट में नहीं था, लेकिन अचानक से इसे जोड़ा गया।

यह फिल्म एक त़वायफ की दर्दभरी कहानी है जिसे  मीना कुमारी (Meena Kumari) ने अपनी खूबसूरत आंखों और डायलॉग से ऐसा सजाया की फिर कोई आग करिश्मा दोहरा नहीं पाया। वहीं, इस फिल्म के छा जाने में सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) द्वारा गाए गए मधुर गीतों का बहुत बड़ा योगदान है। फिल्म के निर्देशक कमाल अमरोही ने किया था जो मुख्य नायिका मीना कुमारी के पति भी थे। कहा जाता है कि जिस तरह से शाहजहाँ ने मुमताज के लिए ताज महल बनवाया था, ठीक इसी तरह से कमाल अमरोही ने मीना कुमारी के बड़ी मशक्कत से पाकीज़ा बनाई थी।

इस फिल्म में कुल 6 गीत थे। जिनका संगीत गु़लाम मोहम्मद (Gulam Mohammed) ने दिया था। लेकिन, बीच मे उनकी मृत्यु 17 मार्च 1968 को हो जाने के बाद के फिल्म का पार्श्व संगीत नौशाद ने तैयार किया। फिल्म के गीतों में पहला, ‛चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो, हम हैं तैयार चलो …’ दूसरा,‛चलते चलते युंही कोई मिल गया था सरे राह चलते चलते ..’ तीसरा, ‛इन्ही लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा …’ चौथा, ‛ठाढे़ रहियो ओ बाँके यार रे..’ पांचवां, ‛आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे, तीरे नज़र देखेंगे, ज़ख्मे जि़गर देखेंगे…’ छटवां रोमांटिक सॉन्ग, ‛मौसम है आशका़ना’ शामिल है।

आज अपनी दुआओं का असर देखेंगे और पद्मा खन्ना
पाकिजा का एक गाना बहुत फेमस हुआ था। वह यह था ‘आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे’। गौर करने वाली बात यह है कि इस गाने के अधिकतर सीन में मीना कुमारी घूंघट में नजर आई थी। दरअसल, इसकी वजह यह थी यह वह वक्त था जब मीना कुमारी की सेहत बेहद नासाज हो चुकी थी और इसका असर उनके शरीर पर भी दिखाई दे रहा था। बताया जाता है कि मीना कुमारी चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं थी। इसलिए डायरेक्टर और उनके पति कमाल अमरोही ने सिर्फ कुछ सीन में मीना कुमारी का क्लोज चेहरा दिखाया था। जबकि जब डॉन्स मूव वाले सीन पद्मा खन्ना (Padma Khanna) पर फिल्माए गए थे।

3 फरवरी 1972 को मराठा मंदिर में इसका प्रीमियर रखा गया था। यह फिल्म के मराठा मंदिर थिएटर में एक भव्य प्रीमियर के साथ रिलीज़ हुई। कहा जाता है कि जब इसका प्रीमियर रखा गया था तो इसके प्रिंट्स को एक पालकी पर ले जाया गया था। यह मीना कुमारी की आख़री फिल्म था। या फिर ऐसा कहा जाए कि मीना कुमारी इसी रिलीज के लिए जिंदा थीं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। दअरसल, वह लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और इसके कुछ दिनों बाद ही उनका निधन हो गया। 16 जुलाई 1956 को पाकीजा का मुहूर्त रखा गया था। लेकिन यह बनते  4 फरवरी 1972 को सिल्वर स्क्रीन तक पहुंची। शुरुआत में फिल्म को ब्लैक एंड व्हाइट पर शूट किया गया था, लेकिन बाद में जब कलर फिल्म का दौर आया तो इसे फिर से रीशूट किया गया। साथ ही बदलती तकनीक की वजह से इस फिल्म में कई बार बदलाव भी किए गए