कलाकारी और उसकी एक बड़ी बहन हैं अदाकारी…अभिनेता राजपाल यादव ने क्या कहा ‛जिंदगी नामा पार्ट-1’ में

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Rajpal Yadav and Parag Chhapekar.jpg

BolBolBollywood.com, Exclusive, मुंबई। बॉलीवुड के सबसे सक्सेसफुल हास्य अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) का नाम इंडस्ट्री में हमेशा अदब से लिया जाता है। उनकी एक्टिंग स्किल का लोहा बड़े-बड़े दिग्गजों ने माना है। वे एक्टिंग में जितने रियल है, रियल लाइफ में भी उतने ही रियल हैं। आइए जानते हैं BolBolBollywood.com के लिए पराग छापेकर से उनकी Exclusive बातचीत..!

सवाल: राजपाल जब हम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भगवान के यहाँ चाय पीते थे और आज राजपाल एक ब्रांड है…तो इस जर्नी को कैसे डिफाइन किया जाए।
जवाब: मैं कोई भी जर्नी सोचने की कोशिश करता हूँ कि हमने क्या-क्या काम किया है जिसमें हमें सुकून मिला है तो उसमें जब राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आता है या मुंबई आता है तो एक एक स्थान का जितना शुक्रिया कहा जाए उतना कम है। जैसे हम कहते हैं एक माँ ने जन्म दिया जन्म भूमि, एक माँ ने जीवन दिया सिनेमा कर्म भूमि। इस बीच की जर्नी जब गांव में था तो गांव का खूब लुत्फ लिया। फिर जब शाहजहाँ पुर आया और पढ़ाई शुरू की तो सरदार पटेल कॉलेज में एडमिशन मिला छोटे से थे तो उसके साथ में जो थियेटर करने का मौका मिला हालांकि शाम को साम बोलता था शाहजहाँ पुर में। शाहजहांपुर नहीं बोल पाता था सुजानपुर बोलता था। लखनऊ में समझो जन्म हो गया, दिल्ली में पाल पोश कर बड़ा कर दिया और मुंबई में उसका इम्प्लीमेंटेशन हो गया।

सवाल: जब यह तय हुआ कि एक्टिंग करना है तो घर में उस समय क्या रिएक्शन था?
जवाब: आपने बड़ी अच्छी बात बोली…कि परिवार जहां पर रहता था या रहता है वहाँ पर दूर-दूर तक कोई माहौल नहीं था। अगर नौटंकी भी अगर देखने जाते थे तो हमारे गांव में ऐसा माना जाता था कि नौटंकी में वल्गर चीज़े ज्यादा रहती थी तो पिताजी वगैरह मना कर देते थे। तो बिस्तर पर तकिया लगाते थे और रात भर नौटंकी देखते थे और 4 बजे से पहले पहुँच भी जाते थे। वहीं, 4 बजे से पहले भी उठ जाते थे कि पता न लगे कि हमने रात भर नौटंकी देखी।

सवाल: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय जिसको हम कहते हैं कि बड़ा प्रीमियर इंस्टीट्यूट है लेकिन यह नाटक के लिए कलाकार पैदा करने वाला बना हुआ है। 10 नाटक करके आप आइए या ग्रैजुएट होकर आइए तब तक हीरो बनने की या हीरोइन बनने की उम्र वह बिता चुका होता है। ऐसे मे कोई यह तय करें कि मुझे फिल्म इंडस्ट्री के लिए ट्राय करना है तो खासकर राजपाल यादव जो अपने आप एक अलग परसोना हो फिजिकली या वैसे..वो तय करता है मुझे एक्टर बनना है इंडस्ट्री में जाना है तो क्या क्या रिएक्शन आते हैं?
जवाब: नई रिएक्शन आते हैं बड़े है लेकिन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यह तय करता है कि अगर वह हीरो हेरोइन पैदा नहीं करता है। लेकिन आप एक बात जरूर मानकर चलिए की राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय अभिनेता पैदा करता हैं। चाहे वह मेल हो चाहे वह फीमेल हो। वह चाहे कलाकार पैदा करे या चित्रकार पैदा करें या पत्रकार पैदा करें। लेकिन जो भी लोग मंडी हाउस की सरजमीं पर कुछ समय बिताते हैं लेकिन उनका प्रजेंटेशन चाहे कही भी हो चाहे पूरे विश्व में कहीं भी चले जाएं असर देता है, वह चाहे आपके व्यक्तित्व में चाहे आपके भाई के व्यक्तित्व में हो।

सवाल: यहाँ पर फिल्म इंडस्ट्री में आप आये और यह सब शुरू हुआ…क्या टर्निंग पॉइंट माना जाए आपके जीवन कि ये मौके ऐसे थे जिन्होंने मेरी लाइफ बदल दी?
सवाल: जी बिल्कुल, एक टर्निंग पॉइंट यह था हमारे जीवन में कि 29 जून 1997 को, वह डेट हम इसलिए नहीं भूलना चाहते है कि क्योंकि वो सुबह 5 बजे बोरीबली का प्लेटफॉर्म वहाँ से हमारी शुरुआत हुई। हमने छोटे सीरियल में जब 2-2 एपिसोड में मुख्य भूमिकाएं होती है जिसमें मोहनदास बीए एलएलबी, पंकज कपूर जी के साथ था, नया दौर तिग्मांशु धूलिया जी के साथ था, बहुत सारे ऐसे जिसमें मंजू सिंह जी का स्वराज, लेकिन जब प्रकाश झा जी के साथ मुंगेरिक भाई नौरंगीलाल मिला तो मुंबई के हिसाब से यह क्षमता आ गई थी कि मुझे सीरियल में काम करना हैं या फिल्मों में काम करना हैं। एक सीरियल जब हमने किया तो मुझे आज सीरियल की बहुत रिस्पेक्ट करता हूँ, टीवी इंडस्ट्री की बहुत रिस्पेक्ट करता हूं कि आज इसका बहुत बड़ा विस्तृत रूप हम देख रहे हैं क्योंकि हम लोगों ने जब 3 चैनल थे तब से हमने इसकी शुरुआत की है। लेकिन हमने वही से तय किया कि मैं फिल्म ट्राई करूंगा मैंने किसी को नहीं बताया कि मैं एक सीरियल में लीड रोल कर रहा हूँ फिर 3 लाइनों के रोल के लिए मुझे ऑडिशन देना पड़ा।
यहां मुझे प्राउड फील हुआ और वो थी शूल। शूल में मुझे 3 लाइन का रोल  30 लाइन को रोल बना। एक ही सीन था और बहुत बड़ा मोड़ था और एक्टर के सपने में एक बीज का काम करता है वह एक सीन। और वहीं से राम गोपाल वर्मा जी ने वह सीन देखा। वो फिल्म देखी और वही से उनको इतना अच्छा लगा पता नहीं कि हमने तो ईमानदारी से उस रोल को किया था जितना कि लीड रोल के लिए करते हैं…जंगल मिली और जंगल से लाइफ में ऐसा मंगल हुआ कि आज काफिले में 150 फिल्में हैं। जब यह जंगल मिली तो प्रॉब्लम यह आ गई कि 6 महीने तक कोई फिल्म ही नहीं मिली। एक आदमी ने 6 महीने तक दाढ़ी बढ़ाई हो और पूरा बरमुडा पहनकर जंगली बना हुआ हो कि फिल्म जब रिलीज होगी तो कुछ काम मिलेगा और पता लगा फिल्म जब रिलीज हुई तो एक काम नहीं मिला। 8-8 महीने हो तो जंगल से जब अवॉर्ड मिला और उधर प्यार तूने क्या किया अगेन रामू जी ने एक फिल्म बनाई रजत मुखर्जी के साथ। उर्मिला मांतोडकर जी और फरदीन खान थे उसमें मुझे एक छोटा शकील का रोल 4-5 सीन का रोल मिला। जब वो रोल मार्केट में आया और उधर जंगल का अवॉर्ड मिला तो लोगों ने देखा कि राजपाल तो जंगली नहीं है और रियल लाइफ में ठीक ठाक दिख रहा तो फिर हमें फैमिली फिल्मों में एक महीने में 16 फिल्में साइन की थी।