जया की कहानी पर बनीं थी ‘शहंशाह’, डायरेक्टर से विवाद इतना बड़ा की रोक दी गई थी शूटिंग

0
226
Shahanshah Movie 1988

BolBolBollywood.com Special Story, मुंबई। 12 फरवरी दिन बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन के लिए बेहद खास है। दरअसल, इस दिन साल 1988 में उनकी फिल्म शहंशाह रिलीज हुई थी। मीनाक्षी शेषादि और अमरीश पुरी की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म कई चुनौतियों का सामना करते हुए जब रिलीज हुई तो इसने कई रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। फिल्म ने अग्रिम बुकिंग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और शीला सिनेमा (दिल्ली) में पहले शो के लिए 20,000 लोगों की भीड़ जमा हुई थी।

जया बच्चन ने लिखी थी कहानी
फिल्म का निर्माण और निर्देशन टीनू आनंद ने किया था। फिल्म की कहानी अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन द्वारा लिखी गई थी और पटकथा लेखक इंदर राज आनंद द्वारा लिखी गई थी, जो फिल्म रिलीज होने से पहले ही इस दुनिया को छोड़ गए थे।

राजनीति के बाद की थी एंट्री
राजनीति में किस्मत आजमाने के बाद अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म से धमाकेदार आगाज किया था। यह फिल्म 1988 की दूसरी सबसे बड़ी कमाई वाली फिल्म बन गई। इसका सबसे प्रसिद्ध संवाद ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लागते हैं… नाम है शहंशाह’ ऐसा फेमस हुआ कि उस दौर में हर गली नुक्कड़ में सुनाई देने लगा था।

टलते-टलते 5 साल आगे बढ़ गई रिलीज
टीनू आनंद 1980 के दशक की शुरूआत में उनके साथ एक और फिल्म बनाना चाहते थे। इसके बाद भले ही टीनू आनंद ने 1983 में बच्चन को साइन कर लिया था। लेकिन फिल्म की शूटिंग शुरू नहीं हो सकी क्योंकि शूटिंग शुरू होने से 3 दिन पहले ही अमिताभ गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। चिकित्सीय जांच के बाद यह पता चला कि उन्होंने मैस्टेनिया ग्रेविस हो चुकी है। यह एक दुर्लभ आॅटोइम्यून बीमारी है। इसके बाद बिग बी की बीमारी और अन्य फिल्मों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण शहंशाह की शूटिंग की शुरुआत 1985 तक टल गई। वहीं, इस समय तक फिल्म की मुख्य नायिका डिंपल कपाड़िया का स्थान मीनाक्षी शेषाद्रि ने ले लिया था। अमिताभ ने इस फिल्म में जो अब तक का कॉस्ट्यूम पहना था उसका वजन लगभग 18 किलो था और अपनी बीमारी के बावजूद अमिताभ ने अपने सभी फाइट सीन में कॉस्ट्यूम पहनने पर जोर दिया।

जब डायरेक्टर से भिड़ गए अमिताभ
खास बात यह थी कि शूटिंग के दौरान अमिताभ और टीनू एक विशेष दृश्य को लेकर असहमत हो गए। वह जिसमें टीनू चाहते थे कि अमिताभ अपनी पुलिस की वर्दी पहनें, लेकिन अमिताभ ने इसके बजाय ब्लेजर पहनने पर जोर दिया। बहस बढ़ते बढ़ते इतनी यहां तक पहुंच गई कि दोनों में से कोई भी अपना रुख बदलने के लिए तैयार नहीं था। इस वजह से शूटिंग को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। हालांकि बाद में टीनू के पिता इंदर राज आनंद के हस्तक्षेप से यह फिर शुरू हो सकी थी। उन्होंने अमिताभ को इस दृश्य के महत्व को समझाते हुए पुलिस की वर्दी पहनने के लिए राजी कर लिया कि शूटिंग फिर से शुरू हो गई। आखिरकार अक्टूबर 1987 में शूटिंग अंतत: समाप्त हो गई।

फिल्म के बहिष्कार की धमकी
फिल्म को शुरू में नवंबर में रिलीज करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन कुछ विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा फिल्म के बहिष्कार की धमकी के कारण रिलीज की तारीख को आगे धकेल दिया गया। दरअसल, इन राजनीतिक पार्टियों का अमिताभ का कांग्रेस के सांसद रहते हुए कुछ मतभेद हो चुके थे और उनकी राजनीति से छोड़ने के बाद कड़वाहट बरकरार थी।

6 करोड़ से अधिक की कमाई करने वाली ब्लॉकबस्टर
आखिरकार 12 फरवरी 1988 में शहंशाह को रिलीज किया गया और यह पांचवे हफ्ते में 6 करोड़ से अधिक की कमाई करने वाली एक बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई। फिल्म ने तेजाब और कयामत से कयामत तक जैसी अन्य सुपरहिट फिल्मों से मजबूत प्रतिस्पर्धा के बावजूद बॉक्स आॅफिस पर जबरजस्त प्रदर्शन किया था।