मधुबाला बर्थ एनिवर्सरी: 50-60 के दशक में हॉलीवुड तक थी धमक, ‘The Venus of Indian Cinema’ जैसे नामों से थी ख्याति

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Madhubala

BolBolBollywood.com, Special Story, मुंबई। बॉलीवुड दिलकश अदाकारा मुधबाला (Madhubala) की आज यानि 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। वह 1950 के दशक की हाइएस्ट पेड अभिनेत्री थी। उनकी तुलना हालीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो से होती थी और इसी वजह से उन्हें ‘बॉलीवुड की मर्लिन मुनरो’ और ‘भारतीय सिनेमा की वीनस’ जैसे उपनामों से पुकारा जाता था। हालांकि उनका असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था। उनके पिता का नाम अता उल्लाह खान और मां आएशा बेगम थीं। उन्होंने अपने दो दशक के करियर में 73 बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। मुधबाला ने अपने करियर की शुरुआत किशोर अवस्था में की थी। उनकी पहली फिल्म 1942 में आई बसंत है तब मधुबााला की उम्र सिर्फ 14 साल थी। इसके बाद 1947 में मधुबाला ने सीधे लीड रोल के लिए स्विच कर लिया। यह फिल्म नील कमल थी। जो बॉक्स आॅफिस पर सुपरहिट रही।

इसके दो साल बाद 1949 में आई एक थ्रिलर फिल्म आई ‘महल’ ने उनकी शोहरत में चार चांद लगा दिए। इसके बाद मधुबाला इंडस्ट्री की सबसे ज्यादा चर्चित अभिनेत्रियों में से एक बना दिया। एक तरह से कहा जाए तो इस दौर में उनका ऐसा जादू था कि उनकी फिल्म में एक झलक से ही फिल्म चल जाने की गारंटी होती थी।

हॉलीवुड से भी आया था आॅफर
मधुबाला के स्टारडम की चमक न केवला बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड तक भी छाई हुई थी। इसके चलते उन्हें एक फिल्म आॅफर हुई थी। लेकिन, किसी वजह से उनके पिता ने इसे स्वीकार्य करने से इंकार दिया। इसके बाद वह अगस्त 1952 के अंक में थियेटर आर्ट्स मैगजीन (अमेरिकन) में दिखाई दी। जिसमें उनकी एक फुल पेज तस्वीर लगाई गई थी। साथ ही एक आर्टिकल प्रकाशित किया गया था। जिसकी हेडिंग ‘दुनिया की सबसे बड़ी स्टार और वह बेवर्ली हिल्स से नहीं है।’ आपको बता दें कि बेवर्ली हिल्स अमेरिका के लॉस एंजेलिस स्थित वह जगह है जहां हॉलीवुड सेलिब्रिटी रहते हैं।

भूमिकाओं में विविधता ने उन्हें बनाया अलग
बॉलीवुड की कई कमर्शियल फिल्मों में काम करने के बाद 1954 में आई फिल्म ‘अमर’ में मुधबाला एक अलग अंदाज में नजर आई। इस फिल्म में सोशल वर्कर का उनका यादगार किरदार दिखाई दिया था। इसके बाद 1955 की श्री मिस्टर एंड मिसेज 55 में आधुनिक गृहिणी का किरदार, इसके बाद 1955 की हावाडा ब्रिज में डॉन्सर का किरदार उनके करियर के लिए अहम पड़ाव साबित हुआ। इसके बाद ‘कल हमारा है’ जो 1959 में आई थी में मधुबाला का दो बहनों का किरदार उनकी पर्सनालिटी से एकदम विपरीत नजर आया। इसके बाद 1960 में आई दो फिल्मों ने उनके करियर को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। इनमें पहली फिल्म मुगल-ए-आजम और दूसरी रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म ‘बरसात की रात’ थी। खास बात यह थी कि मुगल ए आजम में उनका अनारकली का किरदार आलोचकों को भी प्रभावित करने में सफल रहा। यह वह समय था जब उन्हें चौतरफा तारीफें हासिल हुई थी। इसके बाद उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड का नॉमिनेशन हासिल हुआ था।

1971 में फिल्म ज्वाला जो मौत के बाद हुई थी रिलीज
मधुबााला की फिल्मों का जलबा 60 के दशक में बरकरार रहा। उनकी 1961 में आई फिल्म झूमरू, पासपोर्ट और अगले साल 1962 में हाफ टिकट कमर्शियली हिट रही। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस दशक में उनका काम सिर्फ 5 फिल्में तक ही सिमट कर रह गया। उनकी अंतिम फिल्म ज्वाला 1971 में रिलीज हुई थी। जबकि मधुबाला का निधन 23 फरवरी 1969 को हो चुका था।

न तो पार्टी में जाती थी न प्रीमियर में
मधुबाला की निजी लाइफ ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है। वह हमेशा लो प्रोफाइल रहना पसंद करतीं थीं। उन्हें न तो पार्टियों में देखा जाता था और न ही किसी फिल्म के प्रीमियर में। वह इंटरव्यू भी बहुत मुश्किल से देती थी। उनका दिलीप कुमार से लम्बा रिलेशन रहा था। लेकिन, उनकी शादी 1960 में किशोर कुमार से हुई थी।