Lalita Pawar डेथ एनिवर्सरी: सीन शूट करते वक्त पड़े थप्पड़ से गंवाई आंख, मंथरा की भूमिका निभाकर झेली नफरत

0
123
Lalita Pawar Actress
Lalita Pawar birth anniversary

BolBolBollywood.com, स्पेशल स्टोरी, मुम्बई। ऐसे कम ही कलाकार हुए हैं जिन्होंने हर किरदार को ऐसे ढाला है कि वही उसकी पहचान बन गया हो। फिर चाहे वह नेगेटिव हो या फिर पॉजिटिव। लीड कैरेक्टर हो या फिर सहायक। ऐसी ही एक बॉलीवुड में अदाकारा थी जिसने हर विपरित परिस्थियों में भी अपने काम का लोहा मनवाया है। जी हां हम बात कर रहे हैं दिवंगत अभिनेत्री ललिता पवार (Lalita Pawar) की। दरअसल, 24 फरवरी को उनकी डेथ एनिवर्सरी (Death Anniversay) है। उन्होंने हर किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया है कि हर बार वह पहले से बेहतर बनकर सामने आई है। ललिता पवार का निधन 1991 में हो गया था। वह लगभग 700 फिल्मों में काम करने वाली अदाकारा थी जिन्होंने न केवल हिन्दी बल्कि मराठी और गुजराती सिनेमा में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी है। ललिता पंवार का जन्म 19 अप्रैल 1916 को हुआ था।

रामायण में मंथरा की यादगार भूमिका
ललिता पवार का रामानंद सागर के टीवी धारावाहिक रामायण में निभाए गए मंथरा के निगेटिव किरदार को यादगार माना जाता है। मंथरा के किरदार की वजह से ललिता पवार को लोगों की नफरत का भी शिकार होना पड़ा था। वह जहां भी जाती लोग उन्हें अपशब्द कहते और जमकर खरी खोटी सुनाते थे। इसे पहले उन्होंने उन्होंने नेताजी पालकर (1938) जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया। जबकि 1959 में आई श्री 420 और मिस्टर एंड मिसेज 55 की जबरजस्त अदाकारा ने उनके करियर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

9 साल की उम्र से शुरू किया अभिनय
ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को नासिक के येओला में एक रूढ़िवादी परिवार में हुआ था। जहां उनका नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन रखा गया। उनके पिता लक्ष्मण राव शगुन एक अमीर रेशम और कपास के व्यापारी थे। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरूआत 9 साल की उम्र में फिल्म राजा हरिशचंद्र्र (1928) से की थी। उन्होंने बॉलीवुड के साइलेंट इरा से लेकर बोलती फिल्में और फिर रंगीन दौर में कई फिल्मों में काम किया। यही नहीं ललिता पवार ने 1932 में मूक फिल्म कैलाश का सह-निर्माण किया था। इस फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया था। इसके 6 साल बाद 1938 में ‘दुनिया क्या है’ का निर्माण किया। ललिता पवार की 1935 में आई फिल्म हिम्मत-ए-मर्दा में निभाई गई मुख्य भूमिका काफी सराही गई थी।

एक हादसे ने बदल दी थी जिंदगी
दरअसल, बात उन दिनों की है जब 1942 में फिल्म जंग-ए-आजादी की शूटिंग चल रही थी। इसके एक दृश्य में मास्टर भगवान दादा को ललिता पवार को एक थप्पड़ मारना था। लेकिन, भगवान दादा ने ललिता को यह थप्पड़ इतनी जोर से मारा कि उन्हें फेशियल पैरालिसिस हो गया। उनकी आंखों की नसें डैमेज हो चुकी थी और तीन साल तक उन्हें सिनेमा से दूर होना पड़ा। इस हादसे ने ललिता की जिंदगी बदलकर रख दी। एक आंख डैमेज होने की वजह से उन्हें नायिका का किरदार नहीं मिले। लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सिनेमा की खलनायिका के रूप में फिर अपने करियर की गाड़ी फिर दौड़ा दी। यही नहीं इसी वजह से आगे चलकर उन्हें रामानंद सागर की रामायण में मंथरा के यादगार किरदार निभाने का मौका मिल गया।

पति की धोखेबाजी और टूट गई पहली शादी
निजी जिंदगी की बात करें तो ललिता की पहली शादी गणपतराव पवार से हुई थी। यह रिश्ता उनके पति का छोटी बहन के साथ अफेयर के बाद खराब हो गया था। बाद में उन्होंने अंबिका स्टूडियो बॉम्बे के फिल्म निर्माता राजप्रकाश गुप्ता से शादी की थी। 24 फरवरी 1998 को पुणे में उनका निधन हो गया था। जबकि ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को हुआ था।