Birth Anniversay: 70 के दशक में श्रोताओं को आलौकिक दुनिया की सैर कराने वाले संगीतकार थे Ravindra Jain

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Ravidra Jain Birth Anniversay
Ravidra Jain Birth Anniversay

BolBolBollywood.com, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड संगीतकार-गीतकार रविंद्र जैन (Ravindra Jain) के चाहने वाले आज उनकी 77वीं बर्थ एनिवर्सरी (Ravindra Jain Birth Anniversary) पर उन्हें याद कर रहे हैं। उनका जन्म 28 फरवरी 1944 को हो गया। भले ही में अब से 6 साल पहले 9 अक्टूबर 2015 को करोड़ों चाहने वालों को छोड़कर चले गए हैं। लेकिन, वे अपने पीछे खूबसरूत संगीत की ऐसी विरासत छोड़ गए जो उन्हें हमेशा अपने फैन्स के दिलों में जीवित रखेगी। उनकी मधुर संगीत रचनाएं उन्हें कभी विस्मृत नहीं होने देंगी। उन्होंने अपने संगीत में सुरों की अनुभूतियों के ऐसे रंग भरे जो किसी भी सुनने वाले के मन को अलौकिक अहसास कराने में सक्षम थे। यद्यपि रवींद्र जैन दृष्टिहीन थे, लेकिन उन्होंने जैसे संगीत को देखा और रचा है…वह शायद ही कोई दूसरा कर पाए। वे ऐसी अनदेखी दुनिया की संवेदनाओं को सुरों से रूबरू कराने में सफल रहे जो शायद ही कोई दूसरा कर पाए। यही नहीं जब 1970 के दशक में सचिनदेव बर्मन, मदन मोहन, शंकर-जयकिशन, कल्याणजी-आनंदजी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और राहुलदेव बर्मन जैसे दिग्गज संगीतकारों को कोलाहल के बीच अपने अलग संगीत से वो मुकाम बनाया जिस तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है।

रवींद्र जैन का जन्म उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के रामपुर गाँव में हुआ था। वे सात भाई-बहन थे। वर्ष 1972 में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की थी। देख पाने की क्षमता से जन्म से ही अक्षम होने के बावजूद उन्होंने अपनी आवाज के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में वह मुकाम हासिल किया जो इस स्थिति में अब शायद ही कोई कर पाए। उनके पिता इंद्रमणी जैन संस्कृत के बड़े पंडित और आयुर्वेदाचार्य थे। माता का नाम किरन जैन था। रवींद्र उनकी तीसरी संतान थे। वे बॉलीवुड का सफर शुरू करने से पहले जैन भजन गाते थे। हिन्दी फिल्मों में उनके गीत लोकप्रिय हुए है और उनको चाहने वाला बहुत बड़ा वर्ग है। रवींद्र के पुत्र का नाम आयुष्मान जैन है।

रविंद्र जैन ने वैसे तो अपने करियर में कई कर्णप्रिय संगीत से सजे गााने दिए है। लेकिन, उनमें से सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हुए 1973 रिलीज हुई फिल्म ‘चोर मचाए शोर’ का जब दीप जले आना ,1975 में आया गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल, इसके बाद 1976 की सुपरहिट फिल्म चितचोर का ‘जब दीप जले आना’, इसके बाद 1978 में आई ‘पति, पत्नी और वो ’ का ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए ऐसा हिट हुआ की यह आज भी मौके-बेमौके गुनगुनाते देखा जा सकता है। राज कपूर की फिल्म राम तेरी गंगा मैली का ‘एक राधा-एक मीरा’ और ‘सुन साहिबा सुन’ को कौन भूला सकता है। यही नहीं रविंद्र जैन ने सौदागर में ‘सजना है मुझे सजना के लिए’ और नदिया के पार का कौन दिशा में लेके चला, गीत गाता चल का श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम जैसे मील के पत्थर संगीत साबित हुए संगीत के लिए जाना जाता है। इसके अलावा वे अपने निधन के वर्ष 2015 तक संगीत सेवा में जुटे रहे। उन्होंने साल विवाह जैसे पारिवारिक फिल्म के गीत मुझे हक है के अलावा 2015 में आयोध्या करती है आह्वान में संगीत दिया है।

कई पुरस्कारों से नवाजे गए
रविंद्र जैन के संगीत की बात करें तो उन्हें साल 1985 में आई सुपरहिट फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लाजबाव संगीत के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से गया था। इसके बाद 2015 में उनको पद्मश्री दिया गया था। रामानंद सागर द्वारा निर्देशित धारावाहिक रामायण का संगीत भी उन्होंने ही संगीत दिया था। इसके बाद उनकी ख्याति रातों रात आसमान छूने लगी थी।