47 मल्टी हीरो फिल्में…विलेन, हीरो और Osho का सानिध्य, ऐसी थी Vinod Khanna की Life

0
79
Vinod Khanna
Vinod Khanna

BolBolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना (Vinod Khanna) का किरदार रील पर जितना दिलचस्प होता था वे रियल लाइफ में भी उतने ही दिलचस्प रहे हैं। उन्होंने फिल्म ‘मन का मीत’ से विलेन के तौर पर किरदार करियर शुरू किया जो आगे चलकर न केवल हीरो में तब्दील हो गया। बल्कि उन्होंने सियासी पारी में भी वह मुकाम हासिल किया जो आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों को हासिल नहीं होता था। पहले विलेन के सपोर्टिंग किरदार, फिर लीड अभिनेता… और आध्यात्मिक झुकाव के बाद अंतत: एक पॉलिटिशियन की सफल पारी। चौंकाने के लिए काफी है। इन सब में भले ही उनके किरदार बदलते गए पर वे हर जगह सुर्खियां बंटोरते गए। उनके काम की चर्चा हर किरदार में खूब रही है। फिर भले वे 1998 से 2009 तक और 2014 से 2017 तक गुरदासपुर से सांसद रहे हो या फिर अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री। उन्होंने (Vinod Khanna) हर जिम्मेदारी को भी बखूबी संभाला। खास बात यह है कि विनोद खन्ना ने अपने करियर में 47 मल्टी स्टार फिल्मों में काम किया था। लेकिन, इसके बावजूद भी वे अपनी स्टार इमेज को स्थापित करने में सफल रहे, जो हर किसी के बस की बात नहीं होती है। विनोद खन्ना का निधन 27 अप्रैल 2017 को हुआ था।

इन 7 फिल्मों में बनाई पहचान
विनोद खन्ना (Vinod Khanna) ने अपने करियर के शुरुआती दौर में 1968 से 1971 तक सपोर्टिंग निगेटिव रोल निभाए। इनमें पूरब पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिला सजना शमिल है। वहीं, 1970 की कॉमेडी फिल्म मस्ताना शामिल थी। इसमें महमूद और विनोद खन्ना की प्रमुख भूमिकाएं थी। इसके बाद साल 1971 में आई तीन फिल्में ‘मेरा गांव मेरा देश’, मेरे अपने और ऐलान के बाद उनका करियर एक अलग दिशा की तरफ मुड़ चुका था। एक तरह से कहे तो यह उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पाइंट था। इसके बाद वे विलेन के किरदार से सीधे हीरो की भूमिका में आ गए।

1971 से 1982 तक गाड़े सफलता के झंडे
विनोद खन्ना का नाम बॉलीवुड इंडस्टी के उन सफल अभिनेताओं में शामिल है जो अपने दौर में सबसे ज्यादा फीस लिया करते थे। उन्हें 1971 में हीरो के किरदार में पहला ‘हम तुम और वो’ में मिला। इसी साल उनकी फिल्म मेरे अपने को सराहा गया था। इसके बाद गुलजार की फिल्म ‘अचानक’ क्रिटिक्स की सराहना हासिल करने में कामयाब हो गई। इसके बाद 1974 की इम्तेहान, रोटी कपड़ा और मकान और मजबूर ने उन्हें बॉलीवुड इडस्ट्री में स्थापित कर दिया। साल 1977 आते-आते उनका काम बोलना शुरू हो चुका था। वे 1977 में अमर, अकबर और एंथोनी में दिखाई दिए थे। इसके बाद 1978 में मुकद्दर का सिकंदर उनकी महत्वपूर्ण लीड भूमिका रही है। इन दोनों फिल्मों ने कमाई के मामले में बड़ी सफलता हासिल की थी। मुकद्दर का सिकंदर तो इतनी बड़ी हिट हुई कि यह 1970 के बाद ‘शोले’ और ‘बॉबी’ के बाद तीसरी बड़ी फिल्म बन गई जिसने सबसे ज्यादा कमाई की थी।

अचानक से आध्यात्म की तरफ बढ़े कदम
हालांकि, जब उनका करियर पीक पर था तब उन्होंने अचानक से आध्यात्म की राह पकड़ ली। वे आचार्य रजनीश के फॉलोवर बन गए और 1982 में बॉलीवुड इंडस्ट्री को अलविदा कर दिया। हालांकि, 4 साल बाद उन्होंने फिल्म इंसाफ से वापसी की और एक के बाद कई सफल फिल्में देकर खुद को फिर साबित कर दिया।