Irrfan Khan डेथ एनिवर्सरी: दरिया भी मैं, दरख्त भी मैं…मैं था, मैं हूं, मैं रहूंगा

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Irrfan Khan
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BolBolBollywood, Special, Story, मुंबई। बॉलीवुड के लाजवाब अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) की आज पहली एनिवर्सरी है। वे ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने कम समय में ही न केवल बॉलीवुड… बल्कि विदेशों में अपने काम का लोहा मनवाया। कहते हैं इंसान चला जाता है। उसकी कहानियां बिखरी रहती है। इरफान भी ऐसे ही थे। वे हरफनमौला थे। वे दरिया थे। वे दरख्त थे। वे झेलम का बहता पानी थे। वे चिनार थे। वे देर थे, वे हरम भी थे। वे थे, वे हैं, वे रहेंगे। किसे पता था कि ‘हैदर’ में इरफान का वह बेपरवाह अंदाज कभी खुद उनकी ही शख्सिसत का आइना हो जाएगा। जिसमें उन्होंने (Irrfan Khan) कहा था, ‘दरिया भी मैं, दरख्त भी मैं, झेलम भी मैं, चिनार भी मैं, देर भी हूं, हरम भी हूं, मैं था, मैं हूं, मैं रहूंगा।’

कैंसर की बीमारी से जूझते हुए जब इरफान को लगा कि अब वे इससे लड़ नहीं पाएंगे तो उन्होंने अपने चाहने वालों के लिए आडियो संदेश जारी किया। वह आखिरी संदेश। जो हर किसी को रुला गया था। पढ़िए क्या था वह संदेश…
‘हेल्लो भाइयो-बहनों, नमस्कार, मैं इरफान, मैं आज आपके साथ हूं भी हो नहीं भी। यह फिल्म अंग्रेजी मीडियम मेरे लिए बहुत खास है। मेरी दिली ख्वाहिश थी कि मैं इस उतने की प्यार से प्रमोट करूं जितने प्यार से इसको बनाया है, लेकिन मेरे शरीर में कुछ अनचाहे मेहमान बैठे हुए हैं, उनसे वार्तालाप चल रहा है। देखते हैं किस करवट ऊंट बैठता है। जैसा भी होगा आपको इत्तला कर दी जाएगी। कहावत है कि व्हेन लाइफ गिव्स यू लेमन, यू मेक लेमनेड बोलने में अच्छा लगता है, लेकिन सच में जब जिंदगी आपके हाथ में नींबू थमाती है न तो शिकंजी बनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन आपके पास और च्वाइस भी क्या है पॉजिटिव रहने के अलावा। इन हालातों में नींबू की शिकंजी बना भी पाते हैं या नहीं, यह आप पर निर्भर करता है।’

गौरतलब है कि बीते साल 29 अप्रैल 2020 को मुंबई स्थित कोकिलाबेन अस्पताल में उनका निधन हो गया। 7 जनवरी 1967 को राजस्थान के टोंक में जन्मे अभिनेता का पूरा नाम साहेबजादे इरफान अली खान था।