Satyajit Ray 100th बर्थ एनीवर्सरी: ‛पाथेर पंचाली’ से ‛आगन्तुक’ तक 37 रचनाएं…गढ़ते चले गए Cinema

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BolBolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। जब कभी वर्ल्ड सिनेमा के महान निर्देशकों का जिक्र होता है तो सत्यजीत रे की बात न हो ऐसा असंभव है। फिर चाहे 1955 में अनाड़ी क्रू मेंबर्स के साथ करिश्माई पहली रचना पाथेर पंचाली (Pather Panchali) हो या फिर आखिरी 1991 की आगंतुक। अद्भुत सिनेमा गढ़ने का उनका यह सफर 36 साल तक अनवरत चलता रहा। कुल 37 फिल्में और वृत चित्र रुपहले पर्दे पर उतारे गए। सब अल्टीमेट पीस थे। एक तरह से उन्हें फिल्मों का जादूगर कहा जाए तो बड़ी बात नहीं। आज इस महान निदेशक सत्यजीत रे (Satyajit Ray) की आज 100वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 2 मई 1921 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की थी। लेकिन, उनकी भेंट फ्रांसिसी फिल्म डायरेक्टर ज्यां रेनुआ से होना बाद टर्निंग पाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने (Satyajit Ray) लंदन में इतालवी फिल्म ‛बाइसिकल चोर’ देखी। जो उन्हें धीरे-धीरे एक चित्रकार से फिल्म निर्देशक बनने की प्रेरणा देने के लिए काफी थी। उनकी दिलचस्पी इस विधा की तरफ बढ़ती चली गई। आखिरकर वक़्त और परिस्थितियों को मात देते हुए इंडियन सिनेमा का वह सितारा सामने आया जिसकी तारीफ आज भी दुनियाभर के सिने प्रेमी करते नहीं थकते।

11 इंटरनेशनल अवॉर्ड
सत्य जीत रे (Satyajit Ray) की पहली मूवी पथेर पांचाली को कान फिल्म फेस्टिवल में मिले ‛सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख’ पुरस्कार को मिलाकर कुल 11 इंटरनेशनल अवॉर्ड मिले थे। रे फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े सभी काम जिनमें पटकथा लेखन, कॉस्टिंग, म्यूजिक, चल चित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना खुद करते थे। फिल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फिल्म आलोचक भी थे। रे अपने जीवन में कई पुरस्कारों से नवाजे गए जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न (Bharat Ratn) शामिल हैं।

Discovery of India सहित कई किताबों के बनाए फ्रंट पेज
सत्यजीत रे ने कई किताबों के फ्रंट पेज बनाए थे। जिनमें जिम कार्बेट की मैन-ईटर्स ऑफ़ कुमाऊं (Man eaters of Kumaon) और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की महान कृति डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया (Discovery of India) शामिल हैं।

निधन पर हजारों लोग पहुंचे थे श्रद्धांजलि देने
1983 में मूवीघरे बाइरे पर काम करते हुए सत्यजीत रे को हार्ट अटैक आया। जिसका असर उनके काम पर भी पड़ा था। घरे बाइरे की सिनेमैटोग्राफी रे के बेटे की मदद से 1984 में पूरी हुई। इसके चार साल बाद 1992 में उनका स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया, जिससे वह कभी उबर नहीं पाए। मृत्यु से कुछ ही हफ्ते पहले उन्हें एकेडमी अवॉर्ड से नवाजा गया था। 23 अप्रैल 1992 को उनका निधन हो गया। इनकी मृत्यु होने पर कोलकाता में हजारों लोग इनके घर पर इन्हें श्रद्धांजलि देने आए थे।