Amitabh Bachchan नहीं रोकते तो 6 घंटे का महाकाव्य बन जाती ‘Sharaabi’

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Sharaabi 1984
Sharaabi 1984

BolBolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड मेगा स्टार अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अभिनीत फिल्म ‘शराबी’ (Sharaabi) ने 18 मई को अपनी रिलीज के 37 साल पूरे कर लिए हैं। प्रकाश मेहरा (Praksh Mehra) की इस फिल्म को 1984 में रिलीज किया गया था। जीवन में कभी शराब का सेवन नहीं करने वाले मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने फिल्म में इतनी शिद्दत से अपने किरदार को पर्दे पर उतारा कि यह आज भी उनके बेहतर अभिनय करियर में सबसे उम्दा माना जाता है। मदहोश आंखें, लड़खड़ाती जुबान और शायराना अंदाज के साथ ‘मूंछें हो तो नत्थू लाल जैसी’ वाले कालजयी संवादों ने फिल्म को इतिहास में अमर कर दिया। दस साल पहले साल 2012 में इस फिल्म (Sharaabi) को लेकर बिग बी ने रोचक बातें शेयर की थी।

14 और 15 सितंबर की दरम्यिानी रात 2 बजकर 25 मिनट पर अपने ब्लॉग में अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) लिखते हैं कि, ‘जब ‘शराबी’ लिखी जा रही थी, उस समय उसके शब्दों और भावों पर मैने हस्तक्षेप किया था। यह एक ऐसी फिल्म थी जिसमें मुख्य किरदार को पूरी कहानी के दौरान शराब के नशे में रहना था। एक शराबी को वह कहने में समय लगता है जो वह कहना चाहता है। जुबान भारी होती है। चंूकि संवादों को बोलने से पहले उनके निर्माण पर विचार करना होता है। जिसमें समय लगता है। यही नहीं हरकतें काबू में नहीं होती। ऐसे में मैंने प्रकाश जी से कहा कि अगर संवादों की लंबाई कम नहीं की गई तो उनकी फिल्म 6 घंटे की महाकाव्य होगी। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझा और जो कुछ लिखा था, उसे एक संक्षिप्त रूप में संशोधित किया, और जो आप फिल्म में देखते हैं वह उस सबसे जरूरी अभ्यास का परिणाम है।’

शराबी बेटे का वह यूनिक स्टाइल
फिल्म (Sharaabi) देखते वक्त आपने गौर फरमाया होगा कि इस फिल्म में अमिताभ बच्चन एक ऐसे शराबी की भूमिका में नजर आते है जो एक हाथ जेब में रखा होता है। दरअसल, यह यूनिक स्टाइल पहले से प्लान किया हुआ नहीं था। वह बस एक हादसे से उपजी परिस्थिति थी जो फिल्म के लिए फायदेमंद साबित हुआ था। हुआ यूं था कि शराबी की शूटिंग के वक्त दीवाली के मौके पर अमिताभ बच्चन पटाखे फोड़ते वक्त जख्मी हो गए थे। उनका एक हाथ बूरी तरह झूलस गया था। बकौल अमिताभ, ‘मेरे हाथ में दीवाली का एक पटाखा फूट गया था। लेकिन मैंने किसी को परेशान नहीं किया और न ही शूटिंग में देरी की। मेरा हाथ बहुत ही ज्यादा घायल था और ठीक तंदूरी चिकन जैसा लग रहा था। पूरे हाथ का हर हिस्सा झुलस गया था लेकिन मैंने काम नहीं रोका।’बताया जाता है कि बिग बी का यह हाथ इतनी बूरी तरह झूलसा था कि इसे ठीक होने में पूरा एक साल का वक्त लग गया। इस दौरान डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने भी बिग बी को सलाह दी कि तुम इस फिल्म में एक बिगड़े हुए बेटे और शराबी की भूमिका निभा रहे हो, एक हाथ जेब में डाल लो।

35 हजार फीट की ऊंचाई पर आया था आइडिया
बात 1983 की है। तब अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा एक टूर पर निकल पड़े थे। वे न्यूयॉर्क से होते हुए ट्रिनिडाड और फिर टोबैगो के लिए उड़ान भर रह थे। सफर में बातों का सिलसिला चल पड़ा। बातों में प्रकाश मेहरा ने अमिताभ से कहा कि क्यों न एक फिल्म बनाई जाए जो एक अमीर बाप के शराबी बेटे की कहानी पर हो। तब हमारा जहाज अटलांटिक महासागर के ऊपर 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था। कहानी मुझे पसंद आई…बस फिर क्या था पूरी टीम इसके लिए सक्रिय हो गई। नतीजा आपके सामने है साल 1984 में यह फिल्म (Sharaabi) सिनेमा घरों में रिलीज हो गई।

Big B नहीं कर पाए ‘एक गुनाह ऐसा भी’
शराबी (Sharaabi) की शूटिंग के दौरान बिग बी के काम प्रति समर्पण ने प्रकाश मेहरा को बखूबी प्रभावित किया था। इसी वजह से वे चाहते थे कि अमिताभ निर्देशन में भी हाथ आजमाए। इस कभी न बन पाई फिल्म का नाम भी तय हो चुका था। वह था ‘एक गुनाह और सही। फिल्म की कहानी धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर आधारित थी।

मनमोहन देसाई की वह चूभती टिप्पणी
जब शराबी रिलीज हुई को इसके लिए मनमोहन देसाई की फिल्म कूली (Coolie) सिनेमाघरों से उतर चुकी थी। यह फिल्म सिनेमाघरों में खूब चली। लेकिन, इसके बाद प्रकाश मेहरा की फिल्म शराबी रिलीज हुई थी। बस फिर क्या था प्रकाश मेहरा और मनमोहन देसाई में खूब फब्तियां कसी गई। एक दूसरे पर शब्दबाण ऐसे चले कि उस दौर में यह हर सिनेप्रेमियों को हतप्रद करने के काफी थे। अपनी फिल्म अलंकार थिएटर से हटाए जाने को लेकर गुस्से में हैं मनमोहन देसाई कह दिया था कि, ‘एक शराबी ही शराबी जैसी फिल्म बना सकता है।’ फिर क्या था प्रकाश मेहरा कहा चुप रहने वाले थे। उनका भी जवाबी हमला और उसी अंदाज में आया जिसमें मनमोहन देसाई ने वार किया था। प्रकाश मेहरा ने कहा कि, ‘किसी की मुखालिफत करने में इतना नीचे गिरने की सोच ‘कुली ’ बनाने वाले इंसान की ही हो सकती है।’ बहरहाल यह अमिताभ और प्रकाश मेहरा की आखिरी कामयाब फिल्म थी। इसके बाद

शराबी की सफलता में ये भी थे हिस्सेदार
फिल्म की बेशुमार सफलता का पूरा श्रेय अमिताभ की अदाकारा को जाता है। लेकिन, अगर प्राण (Praan), ओम प्रकाश (Om Prakash) और जया प्रदा (Jaya Prada) के बिना इस फिल्म की कल्पना भी बेमानी है। साथ ही कादर खान (Kader Khan) के संवादों ने इसे एक अलग मुकाम दिया था।