Amar Akbar Anthony : 44 पहले इस फिल्म ने दिखाया था बाहुबली जैसा जादू

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Amar Akbar Anthony
Amar Akbar Anthony

BolBolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी ’ (Amar Akbar Anthony) को रिलीज हुए आज 44 साल पूरे हो चुके हैं। 27 मई 1977 को रिलीज हुई इस फिल्म ने सफलता के कई रिकॉर्ड अपने नाम किए है। एक तरह से देखा जाए तो यह फिल्म आज के दौर में मेगा हिट ‘बाहुबली 2’ की व्यावसायिक सफलता को पार कर जाती है। दरअसल, फिल्म 25 सप्ताह तक प्रदर्शित की गई थी। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसकी कुल आय 7.25 करोड़ रुपए थे। तुलनात्मक रूप से यह राशि फिल्म ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ (Bahubali the conclusion) के बॉक्स आॅफिस कलेक्शन से बड़ी हो जाती है।

एक शराबी की कहानी से बुना गया प्लॉट
मनमोहन देसाई निर्देशित और निर्मित इस फिल्म (Amar Akbar Anthony) का मुहूर्त शॉट लीजेंड अभिनेता धर्मेंद्र के हाथों हुआ था। उन्हें फिल्म में अमर के किरदार के लिए अप्रोच किया था लेकिन वे कई फिल्मों में बिजी होने के वजह से इसको छोटा करने के लिए दवाब डाल रहे थे। लेकिन, मनमोहन देसाई ने इससे इनकार कर दिया। दरअसल, फिल्म को मनमोहन देसाई पूरे उत्साह के साथ फ्लोर पर ले गए थे। फिल्म की कहानी उनकी पत्नी द्वारा बताई गई एक न्यूज क्लिप को आधार बनाकर बुनी गई थी जिसमें एक नशेड़ी युवक अपने तीन बच्चों को पार्क में छोड़ गया था।

ईमरजेंसी का दौर और मनमोहन देसाई
3 बिछड़े हुए भाईयों की परवरिश अलग-अलग मजहब के लोगों के यहां होने की स्टोरी का इतना पसंद किया जाएगा किसी ने सोचा नहीं था। दरअसल, यह देश में लागू की गई ईमरजेंसी के बाद का दौर था। सियासी सख्ती के बाद जनता एक ऐसी आवोहवा का सपना देखने की कोशिश में थी जहां हर धर्म और मजहब के लोगों को अपनी तरह से जीने की पूरी आजादी हो। लेकिन, मनमोहन देसाई इसकी सफलता को लेकर तब तक आश्वस्त नहीं दिखाई दिए जब कि उन्हें यह बताया नहीं गया कि सिनेमाघरों के बाद हाउसफुल के बोर्ड लगना शुरू हो गए हैं। यह वह दौर था जब देसाई की फिल्में धर्म वीर, चाचा भतीजा, परवरिश, और अमर अकबर एंथनी आपातकाल की वजह से देरी से रिलीज हो सकी थी। हालांकि, यह कमाल का संयोग है कि ये सभी फिल्में साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी।

Amar Akbar Anthony का मुहूर्त शॉट अभिनेता धर्मेंद्र के हाथ कराया गया था। यही नहीं उन्हें अमर का किरदार भी आॅफर हुआ था।

हालांकि, बाद में उदासीनता का शिकार हो गई
अपने दौर से चमकते सितारे विनोद खन्ना (Vinod Khanna), ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) और अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के साथ शबाना आजमी (Shabana Aazmi), नीतू सिंह (Neetu Singh) और परवीन बाबी (Parveen Bobby) की मुख्य भूमिकाओं में सजी फिल्म से निर्देशिक मनमोहन देसाई (Man Mohan Desai) इस कदर बेफिक्र नजर आ रहे थे कि जब फिल्म (Amar Akbar Anthony) की शूटिंग चल रही थी तो वे इसे अपनी टीम के हवाले कर दूसरी फिल्म को पूरा करने में जुटे हुए थे। इस वजह से फिल्म में कई तकनीकी त्रुटियां सामने आई थी। मसलन अमिताभ बच्चन का कैरेक्टर एंथनी जब शीशे से बात कर रहा होता है तो उसके चेहरे की चोट बार-बार जगह बदलती नजर आई है। हालांकि, उम्दा अदाकारी के आगे सब नजरअंदाज कर दिया गया और फिल्म का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला था।

अमिताभ ने शुरू किया था नया ट्रेंड
अमिताभ बच्चन के करियर के लिहाज से यह फिल्म काफी अहम साबित हुई। फिल्म में उन्होंने कलरफुल बनियान पहनी थी जो आगे चलकर एक ट्रेंड बनकर उभरी थी। देशभर में उनके फॉलोवर उन्हें कॉपी करने लगे थे। खास बात यह है कि यह मनमोहन देसाई की बतौर स्वतंत्र निर्माता के रूप में पहली फिल्म थी। वहीं, कादर खान के संवादों ने इसे कल्ट क्लासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर दिया गया था।

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने रचा कमाल का संगीत
बॉलीवुड फिल्मों का सफल या असफल होने में उसके म्यूजिक का सबसे ज्यादा योगदान होता है। इस फिल्म के साथ भी यही हुआ। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल (Laxmikant Pyaarelal)की जोड़ी ने आनंद बख्शी के गीतों पर ऐसा म्यूजिक दिया कि वह सालों साल तक लोगों की पहली पसंद बना रहा। लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश और किशोर कुमार की आवाजों ने हर गाने में जान डाल दी। खास बात यह है कि फिल्म का सबसे ज्यादा पॉपुलर हुए सॉन्ग ‘माई नेम इज एंथनी’ को पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री बेंजामिन डिसरायली के एक भाषण से लिया गया था। वहीं, यह नाम संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के गुरु का नाम है। लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार और फिल्म को बेस्ट एडिटिंग के लिए भी अवार्ड मिला था।