Juhi Chawla ने भारत में 5G लागू करने के खिलाफ दायर की याचिका, 2 जून को होगी सुनवाई

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5G juhi Chawla
5G टेक्नोलॉजी के खिलाफ अभिनेत्री जूही चावला (Juhi Chawla) ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

मुंबई। दुनिया भर की दूरसंचार कंपनियां अगले कुछ वर्षों (या महीनों) के भीतर 5वीं पीढ़ी के वायरलेस नेटवर्क (5G) को शुरू करने के लिए तैयार हैं। यह वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व सामाजिक परिवर्तन के रूप में स्वीकार किए जाने के लिए तैयार है। इससे धरती के छोर पर यहां तक कि वर्षावनों, मध्य महासागर और यहां तक कि अंटार्कटिका में भी सुपर हाई स्पीड वायरलेस संचार पहुंच आसान हो जाएगी। लेकिन, यह 5G टेक्नोलॉजी इंसानों के लिए नुकसानदेह होने जा रही है। इससे निकलने वाले विकिरण काफी खतरनाक हो सकते है। इसी को लेकर अभिनेत्री जूही चावला (Juhi Chawla) ने दिल्ली हाईकोर्ट में कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है।लेकिन, बताया जा रहा है मामले की सुनवाई अब 2 जून को होगी। इससे पहले भी जूही 5जी टेक्नोलॉजी के खिलाफ 2018 में महाराष्टÑ के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को चिट्टी लिख चुकी है। वहीं, जूही लगातार इसके खिलाफ जागरुकता अभियान चला रही है।

जूही ने एक बयान में बताया कि, ‘हम तकनीकी प्रगति के कार्यान्वयन के खिलाफ नहीं हैं। इसके विपरीत हम नवीनतम उत्पादों का उपयोग करने का आनंद लेते हैं जो कि प्रौद्योगिकी की दुनिया को पेश करना है। जिसमें वायरलेस संचार के क्षेत्र भी शामिल हैं। हालांकि, वायरलेस उपकरणों का उपयोग करते समय हम निरंतर दुविधा में रहते हैं, क्योंकि वायर फ्री गैजेट्स और नेटवर्क सेल टावरों से आरएफ विकिरण का उत्सर्जन करते हैं। इस संबंध में शोध और अध्ययन करने के बाद हमारे पास यह मानने का पर्याप्त कारण है कि विकिरण अत्यंत हानिकारक है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने वाला है।’

आपको बता दें कि भारत ने प्रौद्योगिकी और डिजिटल संचार के क्षेत्र में अपनी प्रगति और उपलब्धियों को दिखाने के प्रयास में ‛5G रेस’ में भी प्रवेश किया है। यदि 5G के लिए दूरसंचार उद्योग की योजनाएं साकार होती हैं तो कोई भी व्यक्ति, जानवर, पक्षी, कीट और पृथ्वी पर कोई भी पौधा इसके खतरों से बच नहीं सकेगा आरएफ विकिरण से 24 घन्टे और  365 दिन इसका प्रभाव बढ़ता जाएगा। यह 5G योजनाएं मनुष्यों पर गंभीर, अपरिवर्तनीय प्रभाव और पृथ्वी के सभी पारिस्थितिक तंत्रों को स्थायी नुकसान पहुंचाएगी।

वहीं, भारत सरकार के दूरसंचार मंत्रालय से आरटीआई के माध्यम से पूछने पर हमें विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड से लिखित में जवाब मिला है। जिसमें कहा गया है कि, ‛एसईआरबी द्वारा कोई अध्ययन विशेष रूप से मनुष्यों, जानवरों, पक्षियों, पौधों या किसी अन्य जीवित जीवों पर 2जी, 3जी, 5जी और 5जी सेलुलर प्रौद्योगिकियों के प्रभाव पर आयोजित नहीं किया गया है।’