Dilip Kumar और Raj Kapoor के घर को खरीदने पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा Government ने दी मंजूरी

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Dilip Kumar ancestral buildings.
Dilip Kumar ancestral buildings in Pakistan,

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) और राज कपूर (Raj Kapoor) के पुश्तैनी घरों को संग्रहालयों में बदलने के उद्देश्य से खरीदने के लिए मंजूरी दे दी। दरअसल, पेशावर जिला आयुक्त कैप्टन (सेवानिवृत्त) खालिद महमूद ने दोनों भवनों के मालिकों की आपत्तियों को खारिज करते हुए घरों का स्वामित्व पुरातत्व विभाग को हस्तांतरित कर दिया है। इसकिे बाद उपायुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि ‘भूमि (Dilip Kumar और Raj Kapoor’s ancestral House) अधिग्रहण विभाग यानी निदेशक पुरातत्व और संग्रहालय के नाम पर निहित होगी।’ यह फैसला पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय सरकार ने लिया है।

सरकार ने तय की है इतनी कीमत
दरअसल, खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने राज कपूर के 6.25-मरला और दिलीप कुमार के चार मरला घरों को क्रमश: 1.50 करोड़ रुपये और 80 लाख रुपए में खरीदने की कीमत तय की थी। जिन्हें संग्रहालयों में बदलने की योजना थी। आपको बता दें कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में यूज की जाने वाली पारंपरिक इकाई मारला को 272.25 वर्ग फुट या 25.2929 वर्ग मीटर के बराबर माना जाता है।

कपूर हवेली के लिए मांगे थे 20 करोड़ रुपए
हवेली के मालिक अली कादिर ने जहां कपूर हवेली के लिए 20 करोड़ रुपये की मांग की थी, वहीं दिलीप कुमार के पैतृक घर के मालिक गुल रहमान मोहम्मद ने कहा कि सरकार को इसे 3.50 करोड़ रुपए के बाजार मूल्य पर खरीदना चाहिए। हालांकि, प्रांतीय सरकार ने पिछले महीने पेशावर के उपायुक्त को इस शहर के केंद्र में स्थित दोनों घरों को संग्रहालयों में बदलने के लिए खरीदने के लिए 2.3 करोड़ रुपए दिए है।

किस्सा ख्वानी बाजार में स्थित है दोनों इमारतें
आपको बता दें कि कपूर हवेली के नाम से जाने जाने वाले राज कपूर का पैतृक घर किस्सा ख्वानी बाजार में स्थित है। इसे 1918 और 1922 के बीच महान अभिनेता के दादा दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने बनवाया था। इमारत में राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था। इसे प्रांतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया है। वहीं, वयोवृद्ध अभिनेता दिलीप कुमार का 100 साल पुराना पुश्तैनी घर भी इसी इलाके में स्थित है। यह घर जर्जर अवस्था में है और 2014 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया था।