Anupama के जरिए India की महिलाओं को सशक्त करने को की ओर अग्रसर Star Plus

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Anupama
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मुंबई। स्टार प्लस (Star Plus) के हिट शो ‘अनुपमा’ (Anupama) के हालिया एपिसोड्स में दर्शकों ने कई रोमांचक उतार चढ़ाव देखे। एक ऐसा ट्रैक जिससे पूरे देश के दर्शकों की आंखों में न सिर्फ दर्द के आंसू ला दिए बल्कि खुशी के भी आंसू देखने को मिले। इस शो की प्रमुख किरदार अनुपमा (Anupama) दर्शकों के समक्ष भारत की वास्तविकता को दर्शाती है, जिसे यह आने वाले दिनों में प्रेरित करना चाहते हैं।

अनुपमा (रूपाली गांगुली द्वारा अभिनीत किरदार) भले ही अब शाह परिवार की कानूनन बहु हो या न हों, लेकिन बाबूजी (अरविंद वैद्य द्वारा अभिनीत किरदार) के लिए वह हमेशा उनकी बेटी रहेंगी। यही कारण है कि उन्होंने शाह परिवार की संपत्ति अपने दो बच्चों वनराज और डॉली के बीच बांटने के साथ अपनी बेटी बनी पूर्व बहू अनुपमा को भी देने का फैसला किया। इन सालों में, स्टार प्लस लगातार विकसित हुआ है और टीवी स्क्रीन पर शक्तिशाली कहानियों को पेश किया है जो समाज को बंधनों से मुक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं जो उन्हें प्रतिबंधित करती हैं। अपने शो के माध्यम से स्टार प्लस ने हमेशा से कई विषयों को उजागर किया है जैसे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, महिला शिक्षा और अब भारतीय बहुओं की स्थिति को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना। ऐसे में यह चैनल हमेशा से महिलाओं के साथ खड़ा रहा है।

एक तरफ यह शो (Anupama) जहां दर्शकों का दिल जीत रहा है वहीं यह अक्सर एक उपेक्षित विषय भी रहा है, जो यह कहता है कि एक बहू भी बेटी होती है। देश भर के लोग अपने घरों से टेलीविजन को देखते हैं, ऐसे में इस तरह के शो दर्शकों और उनके परिवार के सदस्यों को यह महसूस कराते हैं कि महिलाएं भी प्यार और सम्मान के साथ व्यवहार करने की पात्र हैं, चाहे उनकी स्थिति या भूमिका कुछ भी हो।

स्टार प्लस ने अपने प्रगतिशील कंटेंट से कभी भी दर्शकों को निराश नहीं किया है। गुम है किसी के प्यार में से लेकर साथ निभाना साथिया 2 तक, सभी में महिलाओं को सशक्त और प्रेरित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह रूढ़िवादी सोच को तोड़ने और एक ही समय में दर्शकों का मनोरंजन करने में सफलतापूर्वक कामयाब रहे हैं। अपने हर एक एपिसोड के साथ इन्होने पितृसत्ता और पिछड़ी मानसिकता को चुनौती दी है, जिससे इन शोज की महिला दर्शकों को उनकी कीमत जानने और अपना स्टैंड लेने में मदद मिली है। अनुपमा का शाह परिवार में एक बेटी का अधिकार कमाने के बाद, अब उनका घर उनका ससुराल नहीं रहा, ऐसा देखकर यह तय हो गया कि हसमुख, अनुपमा और लीला जैसे अपने प्रगतिशील किरदारों के साथ स्टार प्लस अपनी टैगलाइन ‘रिश्ता वही, बात नई’ पर कायम है।