27 जून को ही जारी हुआ था Karz का म्यूजिक, सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स को कहा-बधाई

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27 जून को ही जारी हुआ था Karz का म्यूजिक, सुभाष घई ने मुक्ता आर्ट्स को कहा-बधाई

BolBolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘कर्ज’ (Karz) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तारीख है। दरअसल, 27 जून को ही इस फिल्म का म्यूजिक जारी किया गया था। इस मौके पर डायरेक्टर सुभाष घई ने अपने ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि, ‘कर्ज (Karz) का आज से 41वां साल है। मुक्ता फिल्म की पूरी टीम को मेरी बधाई। अख्तर फारूकी और जगजीत खुराना के साथ साझेदारी के साथ मेरी वाइफ मुक्ता घई के नाम पर अपना पहला प्रोडक्शन शुरू किया था और 27 जून 1980 को इसका संगीत को जारी किया। यह आज भी तरोताजा हैं।’

लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत
दरअसल, फिल्म (Karz) की असल यूएसपी उसका म्यूजिक था। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत से सजी यह फिल्म आज भी अपनी कहानी से ज्यादा गानों के लिए जानी जाती है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ‘दर्द-ए-दिल’ और ‘ओम शांति ओम’ जैसे सुपरहिट गीत दिए। जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार से नवाजा गया था। वहीं, किशोर कुमार द्वारा गाया गया फिल्म का चार्ट बस्टर गीत ‘ओम शांति ओम’ बिनाका गीतमाला की वार्षिक सूची 1980 में नंबर 2 पर पहुंच गया था। जबकि लता और किशोर का ‘तू कितने बरस की’ 13 वें नंबर पर पहुंचने में सफल रहा। फिल्म के गानों को आनंद बक्शी ने लिखा था जबकि मुहम्मद रफी, आशा भोसले, किशोर कुमार, लता मंगेशकर, मन्ना डे और अनुराधा पौडवाल ने आवाजें दी थी।

पुनर्जन्म की कहानी को नए एंगल के साथ परोसा
आपको बता दें कि 24 अक्टूबर 1978 में सुभाष घई ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी मुक्ता आर्ट्स को ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) स्टारर सदाबहार म्यूजिकल क्लासिक ‘कर्ज’ (Karz) के साथ लॉन्च किया और फिर अपनी हर फिल्म को 24 अक्टूबर को लांच करने की एक परंपरा विकसित की थी। दरअसल, बॉलीवुड में कर्ज फिल्म के साथ पुनर्जन्म की कहानी को नए एंगल के साथ परोसा गया था। इससे पहले ‘मधुमती’ (1958), ‘कुदरत’ (1981) और ‘महबूबा’ (1976) में इस विषय को पेश किया जा चुका था। लेकिन, कर्ज में हत्या के बाद बदला लेने के लिए पुर्नजन्म के एंगल को जोड़ा गया।

बाद में कई फिल्मों में दिखा प्रभाव
हालांकि, अपने समय से बहुत आगे की यह फिल्म तब कुछ खास प्रभाव छोड़ने में असफल रही थी। लेकिन, बाद के वर्षों में यह फिल्म कल्ट क्लासिक बनने में सफल रही है। यही नहीं यह फिल्म कन्नड़ में युग पुरुष (1989); इनक्कुल ओरुवन (1984) तमिल में; आत्मबलम (1985) तेलुगु में; और हिमेश रेशमिया अभिनीत हिंदी फिल्म कर्ज (2008) के रूप में रीमेक बनकर सामने आई। यही नहीं बाद में ओम शांति ओम, पैसा ये पैसा और एक हसीना थी गानों के नाम पर फिल्म आई है।