RD Burman : 331 फिल्मों में संगीत, तबलू से ऐसे बन गए Pancham Da

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Rahul Dev Barman
Rahul Dev Barman

BolBollywood, स्पेशल स्टोरी, मुंबई। ‘पंचम दा’ (Pancham Da) एक व्यक्ति नहीं थे। वे संगीत की दुनिया की एक रिवायत थे जो उनके जाने के दशकों बाद भी संगीतकारों द्वारा फॉलो की जाती है। उनका असली नाम राहुल देव बर्मन (Rahul Dev Burman) यानि आरडी बर्मन था। उनके संगीत आरडी बर्मन ने 331 फिल्मों में संगीत दिया। वे वह देश के अब तक से सबसे सफल म्यूजिक डायरेक्टर थे। 60 से 80 के दशक में पंचम दा ने एक से बढ़कर एक ऐसे गाने दिए जिनको आज तक गुनगुनाया जाता है। आरडी बर्मन (Rahul Dev Burman) ब्रिटिश शासित कलकत्ता में राहुल त्रिपुरा के राजसी खानदान से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता सचिन देव बर्मन हिंदी सिनेमा के अग्रणी संगीतकारों में से एक रहे जबकि इनकी मां मीरा देवबर्मन एक गीतकार थीं। इनके दादा नाबद्विपचंद्र देवबर्मन त्रिपुरा के राजकुमार थे और दादी मणिपुर की राजकुमारी थीं। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा बंगाल से ही हुई थी।

महज 18 साल की उम्र और ‘सर जो तेरा चकराए’
महज 9 साल की उम्र में गाना कंपोज करने म्यूजिक इंडस्ट्री में अपने कदम बढ़ाने आरडी बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। चूंकि घर में संगीत की हवा बहती थी इसलिए नन्हीं उम्र (9 साल) में ही उन्होंने एक गाना कंपोज कर लिया था। जो फिल्म ‘फंटूश’ में ए मेरी टोपी पलट के’ टाइटल से इस्तेमाल किया था। चूंकि यह पहला गाना था इसलिए इसे उतनी सफलता नहीं मिली। लेकिन, इसके बाद उनके अगला गाना ‘सर जो तेरा चकराए’ फिल्म ‘प्यासा 1957’ मोहम्मद रफी की आवाज में आया। यह गाना हिट रहा और संगीत के जानकारों को लगने लगा था कि 18 साल का यह नौजवान आगे चलकर म्यूजिक इंडस्ट्री में एक अलग पहचान कायम करेगा। हालांकि, आरडी बर्मन से उनके पिता इसलिए खफा हो जाया करते थे कि वे अपने म्यूजिक में इंडियन के साथ वेस्टर्न को भी मिक्स कर देते थे।

राहुल देव को इसलिए पुकारते थे पंचम
राहुल देव बर्मन (Rahul Dev Burman) के पंचम दा बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं है। यह काफी मजेदार है। दरअसल, जब आरडी बर्मन का जन्म हुआ तो उनके पिता एसडी बर्मन और उस दौर के मशहूर अभिनेता अशोक कुमार की खूब छनती थी। ये दोनों एक दूसरे की खुशी और गम में शरीक हुआ करते थे। इसी वजह से जब अशोक कुमार नन्हें राहुल से मुलाकात करने पहुंचे तो देखा कि वह बालक जोर-जोर से रो रहा था। इसे देखते हुए अशोक कुमार ने मजाक में कहा कि यह तो रोता भी पांचवें सुर में है। बस फिर क्या था राहुल देव बर्मन की छाप पंचम पड़ गई। इसी छाप से उनके फैंस उन्हें पंचम दा कहकर सम्मानित किया करते थे। हालांकि, तब एसडी बर्मन (सचिन देव बर्मन) उन्हें प्यार से तबलू कहते थे।

किशोर कुमार और पंचम दा
70 के दशक में आरडी बर्मन (Rahul Dev Burman) एक जाने-माने म्यूजिक कंपोजर बन चुके थे। किशोर कुमार और आशा भोसले की सिंगिंग का सुपर स्टार बनाने में पंचम दा के म्यूजिक का पूरा हाथ था। उन्होंने लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी के साथ भी कई सुपर हिट गाने दिए। लेकिन, किशोर कुमार के साथ उनकी जोड़ी ऐसी जमी की उनके साथ का संगीत आज भी सिर चढ़कर बोलता है।

‘पागल टाइप’ आदमी के साथ खूब जमेगी
एक बार किशोर कुमार (Kishor Kumar) के बेटे ने बताया था कि किशोर कुमार और आरडी बर्मन की पहली मुलाकात के बारे किस्सा शेयर किया है। किशोर कुमार और आरडी बर्मन की उम्र में दस साल का फासला है। पंचम दा, किशोर कुमार से दस साल बड़े हैं। अमित कुमार ने बताया कि किशोर कुमार खंडवा से मुंबई आए थे। यहां वह स्ट्रगल कर रहे थे। यह बात उसी समय की है। आरडी बर्मन एक स्टूडियो पहुंचे, जहां पर बाहर काफी लोग जमा थे, लेकिन संगीतकार की नजर दीवार पर बैठे एक आदमी पर पड़ी। दीवार के ऊपर एक आदमी बैठा हुआ था। वह मेरे पिता जी थे। वह बहुत हल्ला मचा रहे थे। गाने गा रहे थे। इसके बाद बताया कि पंचम दा ने पूछा कि वह कौन है। तब किसी ने उन्हें बताया कि यह अशोक का छोटा भाई है। देखो कैसा पागलपन करता है। तब आरडी बर्मन ने कहा कि इसे मैं देखूंगा। यह पागल टाइप का आदमी है, इसके साथ मेरी खूब जमेगी। ।

1942 थी उनकी आखिरी फिल्म
आरडी बर्मन (Rahul Dev Barman) का 54 वर्ष की आयु में 4 जनवरी, 1994 को उनका निधन हो गया। अनिल कपूर की ‘1942: ए लव स्टोरी’ उनकी आखिरी फिल्म बनी, जिसके लिए उन्होंने संगीत तैयार किया। संगीतकार की मृत्यु के बाद फिल्म का संगीत जारी किया गया। यह तुरंत हिट हो गया और मरणोपरांत उन्हें अपना तीसरा और आखिरी फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

दार्जिलिंग में पहली पत्नी से मुलाकात और शादी
संगीत के इस जादूगर पंचम दा (Rahul Dev Burman) की पर्सनल लाइफ में काफी उतार चढ़ाव रहे। उन्होंने दो शादियां की थीं। पहली शादी उनकी एक फैन रीता पटेल से हुई थी। जिनसे पंचम दा पहली दफा दार्जलिंग की वादियों में मिले थे। 1966 में हुई यह शादी 1971 तक ही चल सकी और फिर उनका तलाक हो गया। पत्नी से तलाक के बाद ही एक होटल में ‘परिचय’ फिल्म का गीत ‘मुसाफिर हूं यारों’ कम्पोज किया था। फिर उनकी जिंदगी की आगे बढ़ने लगी।

पंचम दा के प्रपोजल को आशा भोसले का इनकार
हालांकि इससे पहले आशा भोसले से आरडी बर्मन की पहली मुलाकात 1970 की शुरूआत में हो चुकी थी। चूंकि, आशा भोसले के पति गणपतराव भोसले का भी 1966 में निधन हो गया था। ऐसे में पंचम दा और आशा भोसले ने अपनी-अपनी तन्हाईयों को एक साथ मिलाकर कई सदाबहार नगमें श्रोताओं के लिए प्रस्तुत किया। उनके कंपोज किए हुए संगीत में ‘पिया तू अब तो आजा’ और ‘दम मारो दम’ जैसे गीत शामिल है। जिनहोंने ने केवल आशा भोसले को शोहरत दिलाई बल्कि उन्हें कई अवॉर्ड मिले थे। इस बीच पंचम दा उन्हें पसंद करने लगे थे। लेकिन पति के गम में डूबी आशा भोसले ने उन्हें इनकार दिया था। इसके बाद लता मंगेशकर ने उनकी शादी कराने में खूब मदद की थी। जिसके चलते 1980 में यह शादी हो सकी।