1938 में पहली बार गाया था राग खंबवती, 83 साल पहले ऐसी दिखती थी लता जी

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Lata Mangeshkar Singer
Lata Mangeshkar Singer

मुंबई। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar Singer) सोशल पर लगातार सक्रिय है और वह अपने चाहने वालों को लगातार पुरानी यादों से रूबरू करातीं रहती हैं। गुरुवार को ऐसे ही उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम वॉल एक तस्वीर शेयर कर आज दिन 9 सितंबर को पहली बार पिताजी के साथ शास्त्री संगीत और नाट्यगीत प्रस्तुत करने की बात कही है। Lata Mangeshkar ने लिखा है कि, ‘नमस्कार..आज के दिन 9 सितंबर 1938 को सोलापुर के नूतन संगीत थिएटर में मैंने पहली बार मेरे पिताजी के साथ शास्त्री संगीत और नाट्यगीत का कार्यक्रम पेश किया था, जिसमें मैंने राग खंबवती गाया था। ये फोटो उसी कार्यक्रम के लिए खींची गई थी।’ लताजी ने आगे लिखा है कि, ‘मुझे आज भी याद है की मेरा गाना होने के बाद बाबा स्टेज पर आए और गाने बैठे, मैं भी वहीं बैठी हुई थी, बाबा गा रहे थे और मैं बाबा की गोद में सर रखकर सो गई। कितनी मीठी यादें हैं।’

बहरहाल, Lata Mangeshkar Singer की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब पसंद जा रही है। उनके चाहने वाले 83 साल पुरानी यादों का जिक्र करने पर लता जी का आभार जता रहे हैं। एक यूजर्स आशुतोष ने लिखा है कि लता की आवाज बेमिसाल और मधुर है। वह बचपन से ही मेरी पसंदीदा गायिकाओं में सबसे पहला स्थान रखती है। लता जी की पहले नंबर की जगह आज तक कोई नहीं ले पाया है।

आपको बता दें कि इंदौर में मशहूर संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर लता जी का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ था। लता ने अपनी आवाज और अपनी सुर साधना से बहुत छोटी उम्र में ही गायन में महारत हासिल कर ली थी और साल 1943 में महज 13 साल की उम्र में मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए ‘नाचू या गाडे, खेलू सारी, मानी हौस भारी’ गीत के साथ अपने करियर की शुरूआत की थी। इसके बाद ‘पा लागूं कर जोड़ि रे’ गीत के साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी पारी की शुरूआत की थी। इसके बाद लता मंगेशकर को पहला बड़ा ब्रेक साल 1948 में आई फिल्म ‘मजबूर’ का गाना ‘दिल मेरा तोड़ा’ के साथ मिला और फिर उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा।