ट्रेलर में दिखाया Song फिल्म से गायब…‘फैन’ Supreme Court तक लड़ी…आखिर अब मिला इंसाफ

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Shah Rukh Khan
Shah Rukh Khan

मुंबई। आम तौर पर यह होता है कि किसी फिल्म के प्रोमो या ट्रेलर में कुछ दिखाया जाता है लेकिन जब फिल्म देखने जाते हैं तो वह या तो गायब होता है या फिर उस हिस्से को ऐसे दिखाया जाता है मानो उसका होना या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसी स्थिति में दर्शकों के पास मन मसोजकर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। लेकिन, कुछ दर्शक ऐेसे भी होते हैं जो ऐसा नहीं करते हैं। बल्कि वे अपने खर्च किए गए पैसे का पूरा हिसाब मांगने के लिए लड़ाईयां लड़ते हैं। और तब तक इसका पीछा नहीं छोड़ते जब कि वह अपना हिसाब पूरा न कर लें। ऐसा ही कुछ हुआ है शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की एक ‘जबरा फैन’ के साथ।

Release से पहले टाइटल सॉन्ग का प्रचार किया गया
दरअसल, पूरा माजरा यह है कि वह प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स से खुश नहीं थी क्योंकि रिलीज से पहले टाइटल सॉन्ग का प्रचार किया गया था, लेकिन जब फिल्म रिलीज की गई तो इसे पूरी तरह से गायब कर दिया गया। बस फिर क्या था। वही हुआ जो होना था। एक फैन को इससे ऐसा झटका लगा कि वह कई दिनों खुद का गुस्सा शांत नहीं कर पाई। आाखिरकार उसने साल शिकायत कर डाली और बात यही खत्म नहीं हुई। साल 2016 में की गई इस शिकायत के बाद कई जगह अपील-रिअपील। सालों साल तक खूब लड़ाईयां लड़ी गई। आखिरकार मामला ‘सुप्रीम चौखट’ यानि सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। वहां सुनवाई चली और आखिरकर माननीय न्यायाधीशों ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि ‘शिकायतकर्ता आफरीन फातिमा जैदी को 15,000 रुपए का भुगतान किया जाए।’ बता दें कि आफरीन फातिमा जैदी पेशे से शिक्षिका हैं। वह पूरी सुनवाई के दौरान इस बात पर अड़ी रहीं कि वह ‘जबरा फैन’ गाने के बाद शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की FAN को देखने गई तो वह ठगा हुआ महसूस कर रही थी। वह फिल्म में सॉन्ग न मिलने से निराश दिख रही थी जिसके कारण शिकायत हुई।

Common Practice लेकिन इसे रोका जाना चाहिए
शाहरुख खान की फिल्म फैन पर यशराज फिल्म्स (Yash Raj Films) की अपील पर सुनवाई करते हुए दो जजों हेमंत गुप्ता और वी रामसुब्रमण्यम की बेंच ने पूछा, ‘समस्या यह है कि आप (प्रोडक्शन हाउस) ट्रेलर में कुछ और दिखाते हैं जो कि फिल्म में होता नहीं है। आप गाने के साथ अपनी फिल्म की मार्केटिंग क्यों कर रहे थे जबकि आपको पता था कि यह फिल्म के प्रचार के लिए है?’ सुनवाई के दौरान प्रोडक्शन हाउस यश राज फिल्म्स के वकीलों ने यह कहकर अपना बचाव किया कि यह उद्योग में एक ‘सामान्य प्रथा’ है। लेकिन कोर्ट ने यह सुझाव देते हुए बयान को खारिज कर दिया गया था कि इसे एक सामान्य प्रथा होने के बावजूद रोका जाना चाहिए।