‘१९८८ में छोटे पर्दे यानी कि Television से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाले शाहरुख़ अपनी अदाकारी की दम पर दुनियां भर के सिनेप्रेमियों की चाहत का रुख़ अपनी ओर मोड़ लेंगे, ये तो ख़ुद शाहरुख़ ने भी शायद नहीं सोचा होगा. ‘सैन्योरीटा, बड़े-बड़े देशों में छोटी-छोटी बातें तो होती रहती हैं, You Know What I Mean”, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुँह से ‘दिल वाले दुल्हनियां ले जाएँगे’ का ये Dialogue सुनकर सभी लोग उस समय आश्चर्यचकित, हतप्रभ रह गए थे, जब ओबामा जनवरी २०१५ में भारत दौरे पर आए थे. शाहरुख की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है. दुनिया के अनेक देशों में भी शाहरुख़ बेहद लोकप्रिय हैं जितने यहां हैं ।

शाहरुख़ ने अभिनय की शुरुआत १९८८ में दूरदर्शन के धारावाहिक ‘फ़ौजी’ से की थी उसके बाद १९८९ में आए अजीज़ मिर्ज़ा के ‘Circus’ और ‘दूसरा केवल’ में अपनी दमदार अदाकारी से लोगों के दिलों-दिमाग़ पर छा गए. फिर शाहरुख़ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफ़लता के परचम देश भर में ही नहीं, विदेशों तक लहरा दिए.

शाहरुख़ का प्रारम्भिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा और सबसे बड़ी बात ये कि ज़िन्दग़ी में उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया, सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने बलबूते पर. TV या फ़िल्मों में उनका कभी भी कोई ‘God Father’ नहीं था. शाहरुख़ के पिता ताज़ मोहम्मद ख़ान स्वतन्त्रता सेनानी थे और माता भी फ़ौजी की बेटी थीं. शाहरूख़ बेहद होनहार विद्यार्थी होने के साथ-साथ, खेलों-कला के क्षेत्र में भी निपुण रहे हैं. अपने माता-पिता को जल्दी खो देने के बाद शाहरुख़ अपनी बड़ी बहन शहनाज़ को लेकर बम्बई आ गए.

कड़े संघर्ष के बाद हासिल हुई अपनी पहली ही Film ‘दीवाना’ में बेहतरीन अदाकारी के लिये शाहरुख़ को ‘Film Fare Award’ से नवाज़ा गया. उसके बाद बाज़ीगर, डर, कभी हाँ कभी ना ने तो एक के बाद एक सम्मानों और पुरस्कारों की झड़ी ही लगा दी. १९९५ में आई ‘दिलवाले दुल्हनियाँ ले जाएँगे’ शाहरुख़ की अब तक की सबसे बड़ी Hit Film मानी जाती है, जिसने सफ़लता के अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किये. मुम्बई के ‘मराठा मन्दिर’ में ये Film, Release से लेकर आज तक यानी साढ़े २७ साल से लगातार चल रही है. इस Film के लिये भी शाहरुख़ ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ‘Film Fare Award’ हासिल किया.

१९९७ में आई यश चोपड़ा की ‘दिल तो पागल’ है और अज़ीज़ मिर्ज़ा की ‘Yes Boss’ जैसी Superhit फ़िल्मों में शाहरुख़ के अभिनय को भरपूर सराहना मिली. १९९८ में आई करण जौहर की Film ‘कुछ कुछ होता है’ साल की सबसे बड़ी Hit Film साबित हुई और इस Film के लिये भी शाहरुख़ को ‘Film Fare Award’ मिला. इसी साल आई मणिरत्नम की Film ‘दिल से’ में शाहरुख़ के बेहतरीन अभिनय को देश-विदेशों में भरपूर सराहा गया. ‘

Multi Starrer Film ‘कभी ख़ुशी कभी ग़म’ २००१ की सबसे बड़ी Hit साबित हुई तो २००२ में संजय लीला भंसाली की ‘देवदास’ में शाहरुख को उनके बेहतरीन अभिनय के लिये एक फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के ‘Film Fare Award’ से नवाज़ा गया.

वैसे तो राजू बन गया Gentleman, चमत्कार, राम जाने, जोश, चाहत, हम तुम्हारे हैं सनम, फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी, चलते-चलते, कल हो ना हो, वीर ज़ारा, मैं हूँ ना, स्वदेश, Don-1 और 2, चख दे इण्डिया, रब ने बना दी जोड़ी, My Name Is Khan, दिलवाले, चेन्नई Express, रईस, जब तक है जां, वो Superhit फ़िल्में हैं जिन्होंने या तो सफ़लता झण्डे गाढ़े या जिनमें शाहरुख़ अपने शानदार अभिनय से लोगों के दिलों पर छा गए.

बाज़ीगर, डर और अंजाम में शाहरुख ऐसे ख़लनायक बने जिसने ख़लनायक के क्रूर क़िरदार में भी लोगों की जमकर सहानुभूति और वाहवाही बटोरी, डर में तो नायक-नायिका से भी ज़्यादा.

कुल १४ ‘Film Fare Award’ से सम्मानित होने वाले शाहरुख़ को ८ बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के ‘Film Fare Award’ से नवाज़ा गया, उनसे पहले या उनके अलावा ये सम्मान केवल ‘अभिनय सम्राट’ दिलीप कुमार को ही हासिल है. कला के क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिये २००५ में शाहरुख़ को ‘पद्मश्री’ सम्मान हासिल हुआ.

आज २ नवम्बर को अपने जीवन के शानदार गौरवशाली ५७ वर्ष पूर्ण करने वाले, ‘Bollywood के बादशाह’, ‘King ख़ान’ शाहरुख़ ख़ान को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएँ…

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे
मुम्बई
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