अजय देवगन ने पूरी की मैदान के पहले शेड्यूल की शूटिंग

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मुंबई। भारतीय फुटबॉल के सुनहरे अतीत पर आधारित अजय देवगन की अगली फिल्म मैदान का बुधवार को मुंबई में पहला शेड्यूल पूरा कर लिया गया है।दूसरा शेड्यूल मुंबई में भी होगा और इस महीने के अंत में शुरू होने की उम्मीद है।

मैदान में इस साल के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कीर्ति सुरेश और गजराज राव भी हैं। फिल्म के 2020 में रिलीज होने की उम्मीद है। फिल्म ज़ी स्टूडियो और बोनी कपूर द्वारा प्रस्तुत की गई है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म बधाई हो के डायरेक्टर अमित रविंद्रनाथ शर्मा द्वारा निर्देशित, मैदान का निर्माण बोनी कपूर, आकाश चावला और अरुणव जॉय सेनगुप्ता द्वारा किया गया है। पटकथा और संवाद क्रमशः साईविन क्वाड्रोस और रितेश शाह द्वारा लिखे गए हैं।

अजय इस फिल्म में फुटबॉल कोच की भूमिका में नज़र आने जा रहे हैं। जी हां, वह महान फुटबॉल कोच सय्यद अब्दुल रहीम की बायोपिक में लीड रोल करेंगे। अब्दुल रहीम को फुटबॉल के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। कोच के रूप में उनका कार्यकाल भारतीय फुटबॉल का बेहतरीन युग माना जाता है।

उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम पहली बार 1956 के मेलबर्न ओलिम्पिक फुटबॉल टूर्नामेंट के सेमी फाइनल तक पहुंची थी।  रहीम चाचा के नाम से मशहूर सैयद अब्दुर्रहीम वो महान शख्सियत थे, जिनकी कोचिंग की बदौलत भारतीय फुटबॉल टीम दो बार ओलंपिक तक पहुंची। मूलत: हैदराबाद निवासी पूर्व ओलंपियन शाहिद हकीम 2014 से 2015 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्र्वविद्यालय के स्पो‌र्ट्स एडवाइजर भी रहे हैं।

वे बताते हैं कि 1909 में जन्मे उनके पिता 1920 में फुटबॉल खिलाड़ी बन गए थे। उस वक्त देश की टीम नहीं थी। राजा-महाराजा ही अपने क्लब चलाया करते थे। पिताजी क्लब के खिलाडिय़ों को प्रशिक्षण देते थे। इंडियन फुटबॉल टीम बनी तो 1950 से लेकर 1962 तक कोच रहे।

1951 में दिल्ली व 1962 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में टीम ने स्वर्ण पदक जीते। प्रशिक्षण के बूते ही मेलबर्न (1956) में हुए ओलंपिक के लिए टीम इंडिया ने न सिर्फ क्वालीफाई किया, बल्कि चौथा स्थान भी पाया। 1960 के रोम ओलंपिक में भी टीम खेली और छठवें स्थान पर रही। इस टीम का हिस्सा शाहिद भी थे। 1959 में क्वालालंपुर में हुए मर्डिका कप में भी रजत पदक जीता। 1963 में उनका इंतकाल हो गया।