इस बात पर अक्सर चिढ़ जाते हैं अक्षय कुमार

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मुंबई।  अक्षय कुमार की फिल्म ‘मिशन मंगल’ ने बॉक्स ऑफिस 100 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई कर ली है।  अक्षय खुश हैं और इस मौके पर उन्होंने कहा है कि  यह हमारे देश-समाज और परिवार की विडंबना है कि कुछ घरों में आज भी बेटी की पढ़ाई-लिखाई और प्रफेशन चुनने पर रोक-टोक है।

 अक्षय कहते हैं, ‘हमारे यहां आज भी कुछ माता-पिता बेटी की पढ़ाई-लिखाई पर अपनी सुविधा और पसंद का दबाव बनाते हैं। अगर बेटी कहती है कि उसे इंजीनियर बनना है, तो माता-पिता उसे कहते हैं कि इंजीनियर लड़कों का काम है। अगर बेटी वैज्ञानिक बनना चाहे तो कुछ मां-बाप के हिसाब से यह सिर्फ लड़कों का काम है। वह बेटी को डॉक्टर, नर्स या लड़कियों का काम सुझाने लगते हैं। हमारे स्कूलों की किताबों में भी महिलाओं की कहानियों की बेहद कमी है। अब समय आ गया है कि स्कूल में पढ़ाई जा रही किताबों में बदलाव हो, लोगों को महिलाओं की उपलब्धि से जुड़ी तमाम कहानियां बचपन से ही पढ़ने-सुनने को मिलें।’

उन्होंने कहा कि ‘वैसे काफी कुछ बदल रहा है। पहले एक औरत ( निर्मला सीतारमन – फाइनेंस मिनिस्टर ) घर का फाइनेंस संभालती थीं, फिर कॉर्पोरेट का फाइनेंस संभालने लगीं और अब वह देश का फाइनेंस संभाल रही हैं। वह देश की डिफेन्स मिनिस्टर भी रह चुकी हैं। कभी आपने सोचा कि कुछ घर वालों को अगर आप डिफेन्स मिनिस्टर बनने के लिए कहेंगी तो वह थप्पड़ ही मार देंगे।’

अक्षय कुमार कहते हैं -‘अब समय आ गया कि तेजी से यह महिला-पुरुष वाली भेद-भाव की भावना बदले, हालांकि काफी-कुछ बदल भी रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में जब कोई यह कहता है कि यह महिला प्रधान फिल्म है तो मुझे बड़ी चिढ़ होती है। यह वुमन ऑरीएन्टड क्या होता है। फिल्म तो फिल्म होती है। जब हम यह कहते हैं कि सब बराबर हैं तो यह वुमन ऑरीएन्टड और मैन ऑरीएन्टड क्या होता है।’

मिशन मंगल में अक्षय कुमार, शरमन जोशी, विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, नित्या मेनन और कीर्ति कुल्हरी ने काम किया है।