टीवी पर इस अप्रैल में आएंगी 90 के दशक की ये फ़िल्में

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मुंबई।  बॉलीवुड के दीवानों के लिए ’90 का दशक फिल्मों का सुनहरा काल माना जाता है. इस दौर में अनेक बेहतरीन फिल्में तो बनीं ही वे शानदार सितारे भी उभर कर आए जो आज तक हमारे चहेते बने हुए हैं जैसे खिलाड़ी कुमार, हंसा हंसा कर मनोरंजन करने में माहिर गोविंदा, एक्शन पंच वाले सनी देओल या फिर दिलकश फिल्में देने वाले तीन महान खान कलाकार. ’90 का दशक इन सबसे भरपूर था.

हो सकता है कि नई पीढ़ी का होने  कारण आप इनमें से बहुत सी बातों से परिचित न हों, फिर भी आपने उस समय के गाने तो जरूर सुने होंगे जिन्हें आजकल रीमिक्स किया जा रहा है! सोनी मैक्स 2 आपको सुअवसर दे रहा है उस दौर की कुछ बेजोड़ फिल्मों से परिचित होने का जहां आप उस सुहाने सफर पर निकल सकेंगे जिसमें एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा सभी कुछ अपने ओरिजिनल अवतार के रूप में मौजूद हैं.

सलाखें 

 सनी देओल और रवीना टंडन की प्रमुख भूमिकाओं वाली ‘सलाखें’ एक ऐसे बेटे की कहानी है जो बदला लेने के लिए बेचैन है. भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों और दोषपूर्ण न्याय व्यवस्था के चंगुल में फंस जाने की वजह से उसके पिता को आत्महत्या कर लेने पर मजबूर होना पड़ा था. इस फिल्म का निर्देशन किया है एक्शन-ड्रामा फिल्मों के लिए मशहूर गुड्डू धनोआ ने. इसकी शूटिंग 6 महीने में पूरी कर ली गई थी. इसके हाई एक्शन सीन बहुत पसंद किए गए थे. इतना ही नहीं, ‘पंजाबी कुड़ी मारे झटके…’ और ‘जियरा धक धक बोले…’ जैसे गानों पर सनी देओल के डान्स के मूव्स दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते हैं. सोनी मैक्स 2 पर यह फिल्म 21 अप्रैल को शाम 7.00 बजे से दिखाई जाएगी.
 

दुश्मन 

संजय दत्त और काजोल को मेन रोल में लेकर डायरेक्टर तनूजा चंद्रा ने एक ऐसी महिला की कहानी पर यह फिल्म बनाई जो अपनी जुड़वां बहन के साथ बलात्कार करके उसकी हत्या कर देने वाले को ढूंढ रही है. यह साल की बेहतरीन फिल्मों में रही और इसमें कई नामी कलाकारों ने अभिनय किया है जैसे आशुतोष राणा और तन्वी आज़मी.

दिल तो पागल है 

इस फिल्म के टाइटल सॉन्ग के बोल हैं : ‘धीरे धीरे प्यार सिखाता है यही, हंसाता है यही, यही रुलाता है..’ बस, इसी के अनुकूल यह फिल्म आपको प्यार के साथ प्यार करना सिखा देगी. इसमें सभी कुछ बेजोड़ है-संगीत, डान्स मूव्स और ऐसी कहानी जिसमें जबरदस्त पकड़ है. इतना ही नहीं इसकी स्टारकास्ट भी बेजोड़ ही है : शाहरुख खान, अक्षय कुमार, माधुरी दीक्षित और  करिश्मा कपूर. ’90 के दशक की यह सबसे हिट फिल्म देखने से आप खुद को रोक नहीं सकेंगे.

मृत्युदंड 

 माधुरी दीक्षित और शबाना आज़मी की प्रमुख भूमिकाओं वाली यह बेहद रोमांचक फिल्म प्रकाश झा ने निर्देशित की है जिन्हें ‘गंगाजल’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों के डायरेक्शन से बड़ा नाम मिला है. इस फिल्म की कहानी तीन निडर महिलाओं के संघर्ष से संबंध रखती है. ये उस मृत्यदंड के खिलाफ लड़ रही हैं जो इन्हें पुरुषप्रधान समाज द्वारा दिया गया है. इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों, दोनों ने बहुत सराहा था.    इसमें अभिनय के लिए माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और शबाना आज़मी को सर्वश्रेष्ठ सहअभिनेत्री का स्टार स्क्रीन अवॉर्ड 1998 मिला था. साथ ही इस फिल्म को प्रतिष्ठित बैंकॉक फिल्म फेस्टिवल में बैस्ट फीचर फिल्म-एशियन सिनेमा सेक्शन में ऑडियंस अवार्ड भी मिला था.

लम्हे 

निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा की बेहतरीन फिल्मों में से एक ‘लम्हे’ के प्रमुख कलाकार हैं अनिल कपूर और श्रीदेवी. इस जोड़ी की दूसरी फिल्मों को भी बड़ी सफलता मिली है. मोहब्बत और रोमांस भरी यह संगीतमय फिल्म ‘लम्हे’ उन सभी से श्रेष्ठ मानी जाती है. अनुपम खेर और वहीदा रहमान की भूमिकाओं ने इसके आकर्षण को बढ़ाया है. इसकी कहानी एक ऐसे युवक की है जिसे अपने से बड़ी महिला से प्यार हो जाता है लेकिन वह उससे अपने मन की बात कभी कह नहीं पाता. कहानी में रोचक मोड़ तब आता है जब आगे चल कर उस महिला की बेटी को इसी व्यक्ति से मोहब्बत हो जाती है.