Gulabo Sitabo -मस्ती से भरी मनोरंजक फिल्म

Gulabo Sitabo movie review

(Gulabo Sitabo)गुलाबो सिताबो ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली पहली बड़ी फिल्म हैl कुछ फिल्में ऐसी होती है जिसमें शुरुआत से आपको लगता है कि इसका पेस स्लो है और आपको यह फिल्म अपील नहीं करेगी लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है फिल्म का संसार जाने अनजाने आपके भीतर उतरने लगता है आपको समझ में ही नहीं आता आप उस दुनिया का हिस्सा हो गए, (Gulabo Sitabo)गुलाबो सिताबो एक ऐसी ही फिल्म है| निर्देशक आप को आप की अनुमति के बगैर फिल्म में एक अदृश्य किरदार बना लेते हैं |अब यह आपका अपना जीवन होता है |उसके किरदारों के सुख-दुख उनकी तकलीफ है आपकी अपनी हो जाती है

सुजीत सरकार बिना कुछ कहे उन लोगों की बात कहते हैं जिनमें जीने की एक अटूट इच्छा है भले ही वह कितने ही बेसिक लेवल पर हो लेकिन किसी भी तरह बस जीते रहो इसी अदम्य इच्छा में वह कितना कुछ बहुमूल्य दांव पर लगा देते हैं यह उन्हें समझ भी नहीं आता|

यह कहानी लखनऊ की फातिमा बेगम (फारुझ जफ़र)की है जो एक भव्य लेकिन टूटी फूटी हवेली में रहती है उनके पति है मिर्जा (अमिताभ बच्चन) जिन्होंने बेगम से सिर्फ हवेली के लिए ही निकाह रचाया था| मिर्ज़ा ने पूरी जिंदगी इस आस में गुजार दी कि वह किसी दिन हवेली के मालिक होंगे लेकिन बेगम उन से 17 साल बड़ी होकर भी मरने का नाम ही नहीं ले रही|
इस हवेली में कुछ किराएदार भी हैं जो बरसों से हवेली में जमे बैठे हैं, नाम मात्र का पैसा किराए का देते हैं| उसी में से एक है बांके, बाँके और मिर्ज़ा का रिश्ता कुत्ता बिल्ली टाइप का है || क्या मिर्ज़ा बांके को बाकी किरायेदारों के साथ हवेली से बाहर खदेड़ पाएगा? क्या मिर्जा हवेली का मालिक बन पाएगा? क्या बेगम मरेंगी? इसी धागे से बुनी गई है फिल्म (Gulabo Sitabo)गुलाबो सिताबो


मिर्ज़ा बने अमिताभ बच्चन का प्रदर्शन लाजवाब है। इस पावर हाउस परफॉर्मेंस में उनके हाव भाव शारीरिक भंगिमा संवाद अदायगी, भाव अनुभाव, एक अलग ही मुकाम पर है।
वहीं दूसरी ओर आयुष्मान खुराना एक समर्थ कलाकार हैं लेकिन सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने खुलकर परफॉर्म करना आसान नहीं है लेकिन आयुष्मान खुराना इसमें पूरी तरह से सफल रहे हैं। बांके की गरीबी उसकी छटपटाहटइन सबको छुपा कर एकअकड़ दिखाने का डिफेंस मेकैनिज्म आयुष्मान ने बहुत बारीकी से पेश किया है। इसके अलावा बेगम बनी फारुख जफर अपने किरदार में सटीक थी। बृजेंद्र काला और विजय राज ऐसे कलाकार हैं उन्हें किसी भी किरदार में डाल लो वह बिल्कुल वैसे ही हो जाते हैं। इसके अलावा सृष्टि श्रीवास्तव का उल्लेखनीय प्रदर्शन रहा।


फिल्म (Gulabo Sitabo)के गीत जब सुने थे तब अच्छे नहीं लग रहे थे लेकिन फिल्म देखने के बाद फिल्म के गाने आपको अच्छे लगेंगे क्योंकि यह सिचुएशन आधारित गाने हैं
फिल्म किस सिनेमैटोग्राफी कमाल की है एडिटिंग अच्छी है इसके अलावा कॉस्टयूम डिपार्टमेंट ने भी बेहतरीन काम किया है।लेकिन सबसे उल्लेखनीय काम फिल्म के ऑल डायरेक्टर प्रकाश जाधव का लगता है ।


कुल मिलाकर गुलाबो सिताबो(Gulabo Sitabo) एक मनोरंजक फिल्म है जिसे आप परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं
बोल बोल बॉलीवुड की रेटिंग है 4 स्टार