Hapyy Birthday Amrish Puri: मोगैंबो से बाऊजी तक, क्रूर चेहरा मखमली दिल

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मुंबई। एक चेहरा ऐसा कि देखने वाला काँप जाये। और एक चेहरा ऐसा भी कि जिसकी दया और करुणा देख कर दिल पिघल जाए। कागज़ के पन्नों पर लिखी कहानी को अपने में समाहित कर लेना और उसे इस तरह पेश करना मानो वो किरदार असल और फ़िल्मी दुनिया में एक ही जैसा है।  ऐसा बहुत ही कम लोग कर पाए लेकिन शायद अमरीश पुरी जैसा तो कोई नहीं।  

अमरीश पुरी का जन्म पंजाब के नौशेरा गांव में 22जून 1932 को हुआ था। रंगमंच से फिल्मों में आये अमरीश पुरी ने अपने करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम किया।  फिल्म मिस्टर इंडिया में मोगैबो तो उनके नाम का पर्याय ही बन गया था। मोगैंबो खुश हुआ… हर पीढ़ी का पसंदीदा डायलॉग है। 

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अमरीश पुरी अपने आप में चलते फिरते अभिनय प्रशिक्षण संस्थान थे। मुंबई के पृथ्वी थियेटर के लोकप्रिय कलाकार अमरीश पुरी ने  गोविन्द निहलानी की 1983 में आई फिल्म अ‌र्द्धसत्य में अहम् किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके सामने कला फिल्मों के अजेय योद्धा ओमपुरी थे। कुर्बानी ,नसीब, विधाता, हीरो, अंधा कानून, कुली, दुनिया, मेरी जंग, सल्तनत और जंगबाज जैसी कई सफल फिल्मों के जरिए दर्शको के बीच अपनी पहचान बनाते गये।

हरमेश मल्होत्रा की  फिल्म नगीना में उन्होंने एक सपेरे की भूमिका निभाई जो आज भी उनके और श्रीदेवी के स्क्रीन टकराव को लेकर याद की जाती है।  शेखर कपूर की मिस्टर इंडिया ने अमरीश पुरी की ज़िन्दगी में बड़ा मोड़ लाया था।  इस फिल्म में नायक के रूप में अनिल कपूर का चयन हो चुका था जबकि कहानी की मांग को देखते हुये खलनायक के रूप में ऐसे कलाकार की मांग थी जो फिल्मी पर्दे पर बहुत ही बुरा लगे। इस किरदार के लिये निर्देशक ने अमरीश पुरी का चुनाव किया।

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इसके बाद तो मोगैंबो ने इतिहास बना दिया। आज भी इस किरदार को शोले के गब्बर सिंह के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है।  अमरीश पुरी ने स्टीफन स्पीलबर्ग की मशहूर फिल्म इंडियाना जोस एंड द टेपल आफ डोम में खलनायक का रोल किया । इसके बाद उन्हें उन्हें हॉलीवुड से कई प्रस्ताव मिले जिन्हें उन्होंने स्वीकार नहीं किया। 

परदे पर अमरीश पुरी जितने सरल दे उनका दिल असल जीवन में मखमल की तरह था।  एक दम दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के बाऊजी की तरह जो आखिरी में बेटी को कह देता है – जा जी ले अपनी ज़िन्दगी।  गूगल ने आज उसी किरदार के सम्मान में अपना डूडल बना कर श्रद्धांजलि दी है। इसी रोल के लिए अमरीश पुरी को बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर का फिल्म फेयर अर्वाड दिया गया। 
अमरीश पुरी ने गंगा जमुना सरस्वती, शहंशाह, दयावान, सूर्या, राम-लखन, त्रिदेव, जादूगर, बंटवारा, किशन-कन्हैया, घायल, आज का अर्जुन, सौदागर, अजूबा, फूल और कांटे, दीवाना, दामिनी, गर्दिश, करण अर्जुन जैसी सफल फिल्मों में ऐसे ऐसे रोल किये जो उनके सम्पूर्ण कलाकार होने का सबूत देते हैं।  

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इसके अलावा उन्हें मेरी जंग, घातक और विरासत फिल्मों में जानदार अभिनय के लिए फिल्म फेयर के अवार्ड से नवाजा गया। इन सबके साथ ही उन्होंने कोयला, परदेस, चाइनागेट, चाची 420, ताल, गदर, मुझसे शादी करोगी, एतराज, हलचल, किसना जैसी कई फिल्मों के जरिए सिने दर्शकों को अपनी ओर खींचे रखा। 

सुभाष घई के साथ अमरीश पुरी ने विधाता, हीरो, क्रोधी, मेरी जंग, राम लखन, सौदागर, परदेस, ताल, यादें, एतराज और किसना जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया। इसके अलावा गोविन्द निहलानी, बी सुभाष, यश चोपड़़ा और टी रामाराव की फिल्मों में भी उनका अहम योगदान रहा।

अमरीश पुरी ने अमिताभ बच्चन के साथ रेशमा और शेरा, ईमान धर्म, दोस्ताना, नसीब, शक्ति, अंधा कानून, कुली, शहंशाह, गंगा जमुना सरस्वती, जादूगर, अजूबा, आज का अर्जुन, लाल बादशाह, हिन्दुस्तान की कसम, मोहब्बत, लक्ष्य और देव जैसी अनेक कामयाब फिल्मों में काम किया। अमरीश पुरी ने 73 वर्ष की आयु में 12 जनवरी 2005 को निधन हो गया । 

रील  और रियल लाइफ के अमरीश पुरी में जमीन और आसमान का अंतर था।  परदे पर नशे की लत में डूबा रहने वाला ये खलनायक रियल लाइफ में कभी नशा नहीं करता था। न ही सिगरेट का शौक़। वो एक दिन में चार-चार शिफ्ट करते थे, लेकिन घर आते ही दूसरे दिन की तैयारी में जुट जाते।  स्क्रिप्ट 15-20 दिन पहले मंगा लेते थे और पूरे कॉस्टयूम और मेकअप के साथ घर पर भी रिहर्सल करते थे। अपने कॉस्टयूम डिजाइनर से लेकर विग वाले तक, मेकअप, डायरेक्टर सबको शामिल करते थे। अमरीश के मेकअप मैन, और कॉस्टयूम डिजाइनर कभी नहीं बदले।   

कुर्बानी और रेशमा और शेरा जैसी फिल्मों ने भी शुरुआती दौर में उन्हें अच्छी पहचान दिलाने में काफी मदद की।  ‘करन अर्जुन’ वाले खलनायक ठाकुर दुर्जन सिंह हो या ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ के बलवंत सिंह किरदार  को जीना अमरीश जी को बखूबी आता था।   
अमरीश पुरी को गाड़ी चलाने में बड़ा मज़ा आता था।  खूब लांग ड्राइव करते थे। पहले एक सेकेण्ड हैंड एंबेसेडर खरीदी थी। फिर मर्सडिज आयी।  कार की मेकेनिक्स में उनका ज्ञान था। वो सारे ट्रैफिक रूल फॉलो करते थे। सिग्नल तोड़ने का तो सवाल ही नहीं उठता था। पहला मकान मुंबई के सांताक्रूज में था।

डॉग लवर भी थे और अपने कुत्ते का नाम सन्नी नाम रखा था। उसकी मृत्य से दिल ऐसा टूटा कि फिर कोई पालतू जानवर नहीं रखा।  अमरीश पुरी को उनकी जीवन संगिनी उर्मिला दिवेकर मुंबई में मिली। जब अमरीश पुरी ने नौकरी छोड़ कर एक्टिंग में पूरा ध्यान देना शुरू किया तब  उर्मिला जॉब करती थीं। 

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 शाहरुख़ खान, अमरीश पुरी के काफी क्लोज़ रहे। शाहरुख़ की पहली ही फिल्म दीवाना में एक फाइट सीन में अमरीश ने शाहरुख़ को कहा था कि देखो मारते वक्त ध्यान रखना, बटन मत तोड़ना। लेकिन बटन टूट गया।