Happy Birthday Kishore Kumar: पल पल दिल के पास, किशोर दा बेमिसाल

kishore kumar

मुंबई। ग़म हो या ख़ुशी।  दर्द हो या दीवानगी।  इमोशन के हर मोशन में आज भी अगर कोई आवाज़ आपके रूह  उतर जाती है तो वो किशोर कुमार की हो होगी ये तो तय है।  किशोर दा आज होते तो 90 साल के होते।  पर नहीं हैं तो भी उनके सदाबहार गाने उनके बर्थडे सेलेब्रेशन पर रौशनी बिखेरती हुई उस मोमबत्ती की तरह हैं जिन्हें कभी बुझाया नहीं जाएगा। 

 
मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त, 1929 को जन्मे किशोर कुमार के बचपन का नाम था- आभास कुमार गांगुली। किशोर के पिता कुंजलाल गांगुली एक बड़े एडवोकेट और मां गौरी देवी काफी रईस परिवार से ताल्लुक रखती थीं। चार भाई बहनों का उनका परिवार काफी खुशहाल था।

किशोर कुमार जब छोटे थे तभी उनके सबसे बड़े भाई अशोक कुमार एक फेमस एक्टर बन चुके थे।  किशोर कुमार का बस यही सपना था कि वो अपने भाई अशोक कुमार से ज्यादा पैसे कमाना चाहते थे और अपने फेवरेट सिंगर के एल सहगल की तरह गीत गाना चाहते थे।  

इंदौर से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद किशोर कुमार मुंबई अपने बड़े भाई अशोक कुमार के पास आ गए। जहां उन्होंने बॉम्बे टॉकीज के लिए कोरस गाना शुरू किया। 1948 में फ़िल्म ‘ज़िद्दी’ के लिए खेमचंद प्रकाश के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने अपना पहला गाना गाया- ‘मरने की दुआएं क्यों मांगूं…’।

वहां से किशोर कुमार की कामयाबी का सफ़र शुरू हो गया। किशोर कुमार मनमौजी  थे। इमरजेंसी के वक्त संजय गांधी के कांग्रेस की रैली में गाने का प्रस्ताव उन्होंने ठुकरा दिया था। गाना गाते वक्त इतने चुटकुले सुनाते थे कि लता मंगेशकर और आशा भोसले को कहना पड़ता था कि वो किशोर के साथ नहीं गायेंगी क्योंकि किशोर अपना गाना आराम से गा देते थे और बाकी का गाना ख़राब कर देते थे। 


किशोर कुमार ने चार शादियां की थीं। पहली 21 साल की उम्र में बांग्ला फ़िल्मों की मशहूर अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता से । जिनसे इन्हें एक बेटा अमित कुमार हैं। पहली पत्नी से तलाक़ लेने के बाद किशोर कुमार ने 1960 में बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मधुबाला से कोर्ट में शादी की। इस शादी के लिए किशोर कुमार ने अपना नाम बदलकर करीम अब्दुल्ला रखा। 

 किशोर कुमार ने 1976 में बॉलीवुड एक्ट्रेस योगिता बाली से शादी की। यह शादी सिर्फ़ दो साल तक ही चली। किशोर कुमार ने अपनी चौथी शादी बॉलीवुड एक्ट्रेस लीना चंद्रावरकर से 1980 में की। 

किशोर कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा था कि-“कौन मूर्खों के इस शहर (बंबई) में रहना चाहता है, जहां कोई दोस्त नहीं। हर कोई आपका इस्तेमाल करना चाहता है। क्या आप यहां किसी पर भरोसा कर सकते हैं? क्या कोई आपका दोस्त है? मैं इन सबसे दूर चला जाऊंगा। अपने खंडवा में। वो मेरे पुरखों का घर है। उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार खंडवा में ही हुआ।

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 उन्होंने 10 भाषाओँ में तीन हजार से अधिक गाने गाये जिनमें – रूप तेरा मस्ताना, दिल ऐसा किसी ने, खाइके पान बनारस वाला , हज़ार राहें, पग घुंघरू, अगर तुम न होते , मंजिले अपनी जगह और सागर किनारे को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।