Little Baby Movie Review: पिता-बेटी के रिश्तों की जबरदस्त कहानी, मिले इतने स्टार्स

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मुंबई। अभी कुछ दिन  पहले ही डॉटर्स डे मनाया गया जब हर खास और आम लोगों ने अपनी बेटियों के वो दिन स्पेशल डे की तरह मनाया। पिता और पुत्री का रिश्ता ऐसा होता ही जो चिंता गर्व और भावनाओं से ओतप्रोत होता है।  इस पर हिंदी सिनेमा में कई बेहतरीन फ़िल्में भी बन चुकी हैं और अब एक और फिल्म आज शुक्रवार को रिलीज़ हुई है – लिटिल बेबी।  
शेखर झा के निर्देशन में बनी फिल्म लिटिल बेबी में बाप बेटी के रिश्ते को अलग दृष्टिकोण से तलाशने का प्रयास किया गया है जिसके बारे में कहा जा सकता है कि ऐसा अब तक नहीं हुआ है। 

लिटिल बेबी की कहानी है दुष्यंत( प्रियांशु चटर्जी) नाम के पुलिस ऑफिसर और उसकी बेटी साशा( गुलनाज सिगनपोरिया) की है।  इनके रिश्ते सामान्य नहीं हैं। दुष्यंत देहरादून टाउन के प्रभारी हैं। वो अपने कस्बे में देह-व्यापार रैकेट को तोड़ने की कोशिश में है। एक बार वो कॉलेज में रेड डालता है जिसमें कई लड़कियों को रैकेट में पकड़ा गया जिसमें उसकी भी बेटी है। उसके पैरों से जमीन खिसक जाती है।

साशा एक विद्रोही किस्म की लड़की है जो पुरुषों के बनाये कानून से नफरत करती है। वह शर्मिंदा नहीं है, वह क्या कर रही थी। दुष्यंत दिल टूटा जाता है और वह अपने को अकेला और असहाय महूसस करता है। उसे मदद की ज़रूरत है – मनोरोग सहायता की। फिर एक दिन बेटी और बाप के बीच गतिरोध टूटता है। उन्हें लगता है कि उन्हें डॉक्टर की नहीं बल्कि खुद को ठीक करने के लिए एक-दूसरे की जरूरत है।

निर्देशक शेखर झा की फिल्म टेक्निकली  थोड़ी कमजोर भले ही हो लेकिन इमोशंस को पूरी तरह आप तक पहुंचा देती है। एक बेबस लाचार पिता की भूमिका में प्रियांशु चटर्जी ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है जबकि बिगड़ैल बागी लड़की के किरदार में गुलनाज भी अपनी छाप छोड़ जाती हैं ।

कुल मिलाकर यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि लिटिल बेबी मैं कोई बहुत बड़ा स्टार कास्ट तो नहीं है और न ही बड़े प्रोडक्शन हाउस का बैकअप लेकिन रिश्तों के समीकरण के चलते और कहानी के दम पर फिल्म आपको बांधे रखती है और कई तरह के सवाल पैदा करती है। इसलिए फिल्म को देखा जा सकता है। इस फिल्म को 3 स्टार्स मिलते हैं।