Movie Review: करण जौहर के नाम जुड़ा एक और कलंक, SOTY 2 को मिले इतने स्टार

धर्मा प्रोडक्शंस की छवि हिंदी सिनेमा में ऐसी फिल्में बनाने की रही है, जो हकीकत के करीब हो न हों, दिल के करीब ज़रूर रहती हैं। लेकिन, ये तब होता था जब इस कंपनी के मालिक खुद फिल्में बनाने के हर कदम पर इसके हमसफर होते थे। अब धर्मा प्रोडक्शंस को इसकी क्रिएटिव टीम, प्रोडक्शन टीम और मार्केटिंग टीम चलाती है। और, इस टीम के ज्यादातर लोगों का भारतीय ज्ञान मुंबई से विरार तक पहुंचकर खत्म हो जाता है। पहले केसरी, फिर कलंक और अब स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2, इस साल की धर्मा प्रोडक्शंस की तीनों फिल्मों के साथ दिक्कत यही रही है कि इनका हिंदी सिनेमा के बड़े दर्शक समूह से नाता नहीं जुड़ पाया। 

कंपनी की फिल्मों का निर्देशन युवाओं को सौंप रहे हैं, लेकिन इन निर्देशकों से इस भरोसे पर खरा उतरने के लिए जिस मेहनत की दरकार रही, वह ये नहीं कर पाए। मशहूर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के भतीजे पुनीत को करण जौहर ने अब तक तीन फिल्मों में मौका दिया और तीनों का रिपोर्ट कार्ड एक जैसा ही रहा है। स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 पुनीत मल्होत्रा के लिए लिटमस टेस्ट जैसी फिल्म रही लेकिन यहां भी पुनीत आई हेट लव स्टोरीज और गोरी तेरे प्यार में से आगे नही जा पाए।

स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 कहानी है गरीबी और अमीरी की। दोस्ती और दगाबाज़ी की। प्यार और तकरार की। और, ये कहानी है नए इंडिया की। ये कहानी ऐसे माहौल में रची गई है जहां पढ़ाई से ज्यादा जोर किसी छात्र के संपूर्ण विकास पर दिया जाता है। एक साधारण से स्कूल का छात्र स्पोर्ट्स कोटे की बदौलत शहर के सबसे बड़े स्कूल में दाखिला पाता है।

वहां का पोस्टर बॉय और उसकी बहन उसके सामने है। बहन इस गरीब छात्र से मोहब्बत कर बैठती है। गरीबी औऱ अमीरी की जंग में सब कुछ है। लेटेस्ट फैशन है, जिम में तराशे गए बदन हैं, रंग बिरंगे दृश्य हैं, नई पीढ़ी को लुभाने की कोशिश करते गाने हैं, बस कहानी नहीं है।

धर्मा प्रोडक्शंस की किसी फिल्म से हिंदी सिनेमा में करियर शुरू करने का ख्वाब मुंबई के हजारों लड़के लड़कियों को रहता है। लेकिन, स्टूडेंट ऑफ द ईयर में अगर मौका आलिया भट्ट, वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा को मिला तो स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 में नंबर लगा अनन्या पांडे और तारा सुतारिया का।

यूट्यूबर हर्ष बेनीवाल को भी मौका मिला है और आदित्य सील भी कैंपस के बैड बॉय के रूप में हैं। इन सारे नए चेहरों में सिर्फ हर्ष बेनीवाल ही मौका का फायदा उठा पाए और वह इसलिए क्योंकि उनके वीडियोज आम लोग देखते हैं और उन्हें दर्शकों की नब्ज पता है। उनके कॉमिक पंच भी इसीलिए काम करते हैं।

एक निर्देशक के तौर पर पुनीत मल्होत्रा को दो फ्लॉप फिल्में बनाने के बावजूद एक ऐसी फ्रेंचाइजी की सीक्वेल मिली, जिसकी पहली फिल्म को युवाओं ने हाथों हाथ लिया। लेकिन, यहां न तो इश्क वाला लव है और ना ही राधा की चुनरी। कुछ है तो बस ऐसा दिखावा, जिससे दर्शक कहीं भी अपना कनेक्ट नहीं जोड़ पाते। 

पुनीत की सबसे बड़ी कमी इस फिल्म में ये रही है कि उन्होंने फिल्म की स्क्रिप्ट पर कतई काम नहीं किया। बांद्रा में पले बढ़े पुनीत को देहरादून या बोर्डिंग स्कूल्स में पढ़ने वाले छात्रों के बारे में भी कुछ नहीं पता। फिल्म उतनी ही नकली दिखती है, जितना इसके निर्देशक का विजन।’

अदाकारी के मामले में अनन्या पांडे को छोड़ किसी दूसरे को इस फिल्म का फायदा होता नहीं दिखता। उनकी स्क्रीन प्रजेंस प्रभावी रही है। तारा सुतारिया को देख लगता ही नहीं कि वह फिल्म की हीरोइन हैं। जो जीता वही सिकंदर का पॉलिश्ड वर्जन बन कर रह गई स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 का लचर संगीत भी इसकी बड़ी कमजोरी है।  धर्मा प्रोडक्शंस की पिछली फिल्म कलंक वरुण धवन के करियर का रोड़ा बन चुकी है, वही काम स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 ने टाइगर श्रॉफ के लिए किया है।

उम्मीद की जानी चाहिए कि केसरी, कलंक और स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 का बॉक्स ऑफिस हाल देख करण जौहर अपनी क्रिएटिव टीम और मार्केटिंग टीम के साथ नए सिरे से रणनीति बनाएंगे और गुड न्यूज की रिलीज तारीख के आगे खिसकने का फायदा उठाकर उसे इन फिल्मों से बेहतर बनाएंगे। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 को मिलते हैं दो स्टार।(साभार-अमर उजाला)