संजय मिश्रा ने नेशनल अवॉर्ड देने के तरीके पर उठाये सवाल

sanjay mishra

मुंबई।  दमदार अभिनेता संजय मिश्रा स्टारर फिल्म टर्टल को हाल ही में नेशनल अवॉर्ड मिला।  ऐसा दूसरी बार है जब संजय मिश्रा की फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिला है।  इससे पहले उनकी फिल्म मसान के साथ ऐसा हुआ था। संजय खुश हैं लेकिन उन्होंने नेशनल अवॉर्ड देने के तरीके पर सवाल उठाया है।  

उन्होंने कहा कि अवॉर्ड की बात सामने आती है तो बहुत सारी बातें सामने आती है।  शायद पैसा, पार्टी, पॉलिटिक्स, देश, धर्म, जात-पात सब कुछ आ जाता है । इतना साफ-सुथरा नहीं है नेशनल  अवॉर्ड देने का तरीका। आज कल कोई भी अवॉर्ड साफ-सुथरा नहीं है।  

उन्होंने कहा कि शायद जो लोग राष्ट्रीय अवॉर्ड देते हैं, उनको मेरा काम अवॉर्ड की  नहीं लगता होगा।  जब कोई मेरी फिल्म आंखो देखी देखकर मुझे गले लगा कर रोने लगता है, वही मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होता है।  आंखो देखी जैसी फिल्म अगर आपने देखी है तो आपको लगता नहीं कि उस फिल्म को कुछ नहीं तो कॉस्ट्यूम के लिए अवॉर्ड मिलना चाहिए था, उसकी स्क्रिप्ट को तो अवॉर्ड मिलना चाहिए था ।

उन्होंने कहा कि आंखों देखी और कड़वी हवा को नेशनल अवॉर्ड वालों ने किसी काबिल ही नहीं समझा।  मैं इस समय बहुत अच्छा काम कर रहा हूं, राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर  मुझे कहते हैं कि फिल्म की कहानी आपको ध्यान में रखकर लिखी गई है, मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात है। मैंने ऐसा काम किया है कि आज से 15-20 और 25 साल बाद मेरे बच्चे यह कहेंगे कि मेरे पिता कमाल के ऐक्टर हैं।’ एक समय था जब मेरे पास कोई काम नहीं था, मैं खाली बैठा था, आज ऐसा समय है, जब काम ही काम है, लेकिन अपने घर वालों को अच्छा समय देता हूं। बच्चों को खुद खाना बना कर खिलता हूं।