श्याम रामसे का निधन, हॉरर की दुनिया में ‘वीराना’,

shyam ramsey

मुंबई।  एक ज़माने में भूतिया फिल्मों के जरिये लोगों में डर पैदा करने वाले घराने रामसे ब्रदर्स के एक भाई श्याम रामसे का मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया है। सीने में दर्द के शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था। वो 67 साल के थे।  

श्याम रामसे के निधन के साथ फिल्मों में हॉरर जॉनर के एक युग का अंत हो गया।  आज शाम विले पार्ले श्मसान गृह में उनका अंतिम संस्कार होगा। श्याम रामसे ब्रदर्स के नाम से मशहूर सात रामसे भाईयों में से एक थे। उनके पिता फतेहचंद रामसिंघानी  विभाजन के बाद कराची से मुंबई आये थे और इसके बाद उनके बेटों ने हॉरर फिल्मों में हाथ आजमाया।

श्याम ने 1972 में बॉलीवुड की पहली हॉरर फिल्म ‘दो गज जमीन के नीचे’ बनाई थी। श्याम के बड़े भाई तुलसी रामसे ने ‘वीराना’ बनाई थी। ये दोनों फ़िल्में भारतीय सिनेमा में हॉरर जॉनर का बड़ा इतिहास हैं। 

पिछले साल दिसंबर में तुलसी रामसे का निधन हो गया था। रामसे ने 70 और 80 के दशक में रामसे ब्रदर्स के नाम से एक के बाद एक हॉरर फ़िल्मों का निर्माण किया था।  इसकी शुरुआत उनके निर्देशन में 1972 की फ़िल्म ‘दो गज ज़मीन के नीचे’ से हुई और इसके बाद रामसे ब्रदर्स ने एक के बाद एक हॉरर फ़िल्मों का निर्माण करके दहशत की एक अलग दुनिया रच दी।

रामसे ब्रदर्स ने आत्मा, बंद दरवाज़ा, तहखाना, वीराना, घुँघरू की आवाज, सन्नाटा, महाकाली, और 3 डी सामरी जैसी फ़िल्मों का निर्माण किया था।  सेमी बोल्ड और फुल हॉरर जॉनर को एक अलग मुकाम तक ले जाने में तुलसी और उनके छह भाइयों ( कुमार, श्याम, केशु, अर्जुन, गंगू और किरण रामसे) ने बड़ी भूमिका निभाई और हर फिल्म के साथ अलग अलग मेकिंग का डिपार्टमेंट भी संभाला।  एक ज़माने में उन्हें उनकी फिल्मों के कारण ‘मिनी कॉटेज इंडस्ट्री’ भी कहा जाता था।