Gulzar ने ऐसे लिखा अपना पहला गाना

Gulzar

मुंबई | प्रसिद्ध राइटर Gulzar जो आज अपनी कामयाबी के कई अध्याय लिख चुके हैं, के पहला गीत लिखने के पीछे भी एक लम्बी दास्ताँ हैं |

हुआ यूँ कि जब दिवंगत बिमल रॉय “बंदिनी” बना रहे थे तब शैलेंद्र इसके गीतों के बोल लिख रहे थे। सचिन देव बर्मन इस फिल्म के संगीत निर्देशक थे। शैलेन्द्र और बर्मन के बीच कुछ विवाद था, तो उन्होंने शैलेंद्र के साथ काम करने से इनकार कर दिया था।

बिमल रॉय चिंतित थे।तब किसी ने उन्हें एक सरदारजी, एक मोटर कार मैकेनिक सम्पूर्ण सिंह कालरा के बारे में बताया, जो पाकिस्तान से आये थे, जो गीत लिखने का मौका तलाश रहे थे। विमल राय ने विस्मय में पूछा कि एक मोटर मैकेनिक कैसे गीत लिखेगा ,लेकिन फिर हताश बिमल रॉय ने कहा कि ठीक है, उसे अंदर ले आओ।

तब सम्पूरण सिंह ने आकर सीन और स्टोरी लाइन देखी और अपनी पहली फिल्म के लिये पहला गाना लिखा |बिमल रॉय भी काफी आश्चर्य में थे कि यह गाना इतना ज्यादा हिट कैसे हो गया, क्योकि इस गाने ने एक इतिहास रच दिया ,यह गाना था – “मोरा गोरा रंग लेले , मोहे श्याम रंग देदे”|

इस गीत को महान गायिका लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ दी थी और सरदार संपूरन सिंह कालरा ने बाद में अपना नाम बदल लिया और जिन्हें आज हम Gulzar के नाम से जानते हैं|