अहिंसा के पुजारी बापू के बर्थडे पर आएगा ‘ऊधम सिंह’ बायोपिक,विक्की हैं लीड रोल में

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मुंबई l फिल्म उरी सर्जिकल स्ट्राइक की कामयाबी के बाद रातो रात स्टार बन गए विक्की कौशल अब शहीद ऊधम  सिंह के बायोपिक में नज़र आएंगे और ये फिल्म अगले साल दो अक्टूबर को रिलीज़ होगी।  

शूजित सरकार के निर्देशन में बन रही स्वतंत्रता सेनानी सरदार ऊधम सिंह की इस बायोपिक की रिलीज़ डेट जारी कर दी गई है। जालियांवाला बाग कांड का बदला लेने के लिए ऊधम  सिंह ने जनरल डायर को मारा था। इस फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी गई है l शूटिंग लोकेशन से विक्की और शूजित की कुछ तस्वीरें भी जारी की गई हैं l

ये फिल्म अगले साल यानि 2020 में दो अक्टूबर के दिन रिलीज़ होगीl   यह फिल्म क्रांतिकारी ऊधम सिंह की बायोपिक है, जिन्होंने 1940 के नरसंहार का बदला लेने के लिए ब्रिटिश भारत में पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की हत्या कर दी थी।

 विक्की को कास्ट करने के बारे में बात करते हुए, शूजित कहते हैं, “अगर आप विक्की के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो वह बहादुर कदम उठा रहा है और कुछ शानदार विकल्प चुन रहा है। मैं एक ऐसा अभिनेता चाहता था, जो फिल्म के लिए अपना दिल और आत्मा देने के लिए तैयार है। विक्की एक पंजाबी लड़का है और मेरी फिल्म एक पंजाबी आदमी की कहानी है। इसलिए सभी तरह से वह मेरी पसंद बन गया ” l

निर्देशक शूजित सरकार हमेशा से ही विक्की के विशलिस्ट में रहे हैं l विक्की कहना है क़ि “यह एक असली एहसास है क्योंकि यह एक सपने के सच होने जैसा है क्योंकि मैं आखिरकार उसके साथ काम करने जा रहा हूं जिसका मैं हमेशा उनका एक बड़ा प्रशंसक रहा हूं। शूजीत सर उनकी कहानियों को जिस तरह से महत्व देते हैं ,उनका कॅरेक्टर को देखने का नज़रिया इन सबका मैं फैन हूँ , इसके अलावा, यह मेरे लिए भी एक बड़ा सम्मान है।

कौन थे सरदार  ऊधम  सिंह – 


शहीद ऊधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। सन् 1901 में ऊधम सिंह की माता और 1907 में उनके पिता का निधन हो गया। इस घटना के चलते उन्हें अपने बड़े भाई के साथ अमृतसर के एक अनाथालय में शरण लेनी पड़ी।

वहां  1917 में उनके बड़े भाई का भी निधन हो गया। 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में शमिल हो गए। उधम सिंह 13 अप्रैल 1919 को घटित जालियांवाला बाग नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे।

इस घटना से वीर ऊधम सिंह तिलमिला गए और उन्होंने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ डायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ले ली। 
जलियांवाला बाग हत्याकांड के 21 साल बाद  शहीद ऊधम सिंह 1934 में लंदन जाकर रहने लगे थे। 1940 में रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के कॉक्सटन हॉल में बैठक थी। इस बैठक में डायर को भी शामिल होना था। ऊधम सिंह भी वहां पहुंच गए।

जैसे ही डायर भाषण के बाद अपनी कुर्सी की तरफ बढ़ा किताब में छुपी रिवॉल्वर निकालकर ऊधम सिंह ने उसपर गोलियां बरसा दीं। डायर की मौके पर ही मौत हो गई। ऊधमसिंह को पकड़ लिया गया और मुकदमा चला। 31 जुलाई 1940 को उन्हें फांसी दे दी गई।